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Tuesday, February 10, 2026

प्रधानमंत्री आवास घेराव को जा रहे यूथ कांग्रेस नेता फ़ैज़ महमूद नज़रबंद



बागपत में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की नज़रबंदी, केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

अनम शेरवानी
नित्य संदेश, बागपत। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ मैराजुद्दीन अहमद के पुत्र यूथ कांग्रेस नेता एवं बुलंदशहर–अलीगढ़ के प्रभारी फ़ैज़ महमूद को उनके साथियों के साथ प्रधानमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम में शामिल होने से पहले नज़रबंद कर लिया गया। यह कार्रवाई बागपत के शीश महल, रटौल स्थित निवास पर की गई।

फ़ैज़ महमूद के साथ जिन नेताओं को नज़रबंद किया गया, उनमें जिला अध्यक्ष (विचार विभाग) महबूब अंसारी, कांग्रेस नगर उपाध्यक्ष जावेद चौधरी, नगर सचिव इमरान चौधरी, इंतज़ार चौधरी, खालिद चौधरी, नसीरुद्दीन अंसारी, हारून नेता, यूसुफ चौधरी, फ़ैज़ल जब्बार, चेतन पाल, सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल है। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. मैराजुद्दीन अहमद के पुत्र यूथ कांग्रेस के नेता फ़ैज़ महमूद ने बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक विरोध से घबराई हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के सवालों से बचने के लिए विपक्षी नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं को नज़रबंद कर रही है। 

फ़ैज़ महमूद ने कहा कि एपिस्टीन फाइलों में प्रधानमंत्री मोदी के जिक्र ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है, इसके अलावा कई ताक़तवर लोगों के नाम उजागर होने की चर्चाएं हैं, लेकिन भारत सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारत के हितों से समझौता किया जा रहा है, जिससे देश के किसानों, व्यापारियों और युवाओं के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति, व्यापार समझौतों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की भूमिका सवालों के घेरे में है, लेकिन इन मुद्दों पर जवाब देने के बजाय शांतिपूर्ण विरोध को रोका जा रहा है।

 फ़ैज़ महमूद ने नज़रबंदी की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन बताया और कहा कि सवाल पूछना लोकतंत्र का मूल अधिकार है, जिसे दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि कांग्रेस एवं यूथ कांग्रेस द्वारा चलो दिल्ली, देश बचाओ के आह्वान पर 10 फ़रवरी 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित था। नज़रबंदी और प्रशासनिक दबाव के बावजूद पार्टी कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से की अपनी बात रखते रहेंगे। घटना के बाद स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराज़गी देखी गई।

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