-मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव को सौंपा ज्ञापन, कार्यवाही
की मांग
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। संयुक्त प्रेस क्लब के अध्यक्ष एवं महामंत्री के
नेतृत्व में सोमवार को उपाध्यक्ष संजय मीणा की अनुपस्थिति में मेरठ विकास प्राधिकरण
(एमडीए) के सचिव आनंद कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रवर्तन/जोनल
अधिकारी के निर्देश पर एमडीए कार्यालय में पत्रकार को अवैध रूप से प्रवेश से रोके जाने
के मामले में 48 घंटे के भीतर कार्यवाही की मांग की गई है।
ज्ञापन में अध्यक्ष अतुल माहेश्वरी ने बताया कि मेरठ विकास
प्राधिकरण एक सार्वजनिक स्थान है, जो जनता के धन से संचालित होता है। ऐसे कार्यालय
में आम नागरिक, शिकायतकर्ता, पत्रकार, आरटीआई कार्यकर्ता, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं
का प्रवेश संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकार है। इसके बावजूद पत्रकारों को “बाहरी व्यक्ति”
बताकर रोका जाना गंभीर, असंवैधानिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध है।
घटना का विवरण
बताया कि गुरुवार को एक पत्रकार एमडीए कार्यालय में गए
थे। इसी दौरान गेट पर तैनात प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड (नाम बाबू ख़ान) ने उन्हें यह
कहते हुए रोक दिया कि “जोनल अधिकारी अर्पित यादव का आदेश है कि बाहर का कोई भी व्यक्ति
अंदर नहीं आएगा।” जब उक्त आदेश की लिखित प्रति मांगी गई तो गार्ड द्वारा बदतमीजीपूर्ण
भाषा का प्रयोग करते हुए धमकी भरे अंदाज़ में कहा गया, “जो करना है कर लो, अंदर नहीं
जाने दूंगा। गार्ड ने यह भी स्वीकार किया कि कोई लिखित आदेश नहीं है, बल्कि पत्रकारों
एवं आरटीआई कार्यकर्ताओं को रोकने का मौखिक आदेश दिया गया है।
25 अक्टूबर 2025 के आदेश पर सवाल
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रवर्तन/जोनल अधिकारी अर्पित
यादव द्वारा 25 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश में “बाहरी व्यक्ति” शब्द का प्रयोग किया
गया है, लेकिन इसकी कोई स्पष्ट कानूनी परिभाषा नहीं दी गई है। यह स्पष्ट नहीं किया
गया कि पत्रकार बाहरी व्यक्ति हैं या नहीं, आरटीआई कार्यकर्ता बाहरी व्यक्ति हैं या
नहीं, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता बाहरी व्यक्ति हैं या नहीं, बिना परिभाषा के
ऐसा आदेश मनमाना, अव्यवहारिक और लागू न किए जाने योग्य है, जो मौखिक तानाशाही और अधिकारों
के दुरुपयोग को बढ़ावा देता है।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
ज्ञापन में कहा गया कि यह कृत्य संविधान के अनुच्छेद
19(1)(a) के अंतर्गत प्रेस की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है, सूचना का अधिकार अधिनियम-2005
की पारदर्शिता की भावना के विरुद्ध है, सार्वजनिक कार्यालय में मौखिक आदेशों के आधार
पर प्रवेश रोकना प्रशासनिक नियमों के खिलाफ है, यह भी स्पष्ट किया गया कि प्राइवेट
सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी अवैध निर्माण हटाने या सीलिंग की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा
तक सीमित है, न कि किसी पत्रकार या नागरिक को सार्वजनिक कार्यालय में प्रवेश से रोकना
या दुर्व्यवहार करना।
प्रमुख मांगें
संयुक्त प्रेस क्लब द्वारा मांग की गई कि 25 अक्टूबर 2025
के अस्पष्ट आदेश को तत्काल निरस्त या स्पष्ट किया जाए। “बाहरी व्यक्ति” शब्द की स्पष्ट,
लिखित एवं कानूनी परिभाषा जारी की जाए। पत्रकारों, आरटीआई कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों
के प्रवेश पर लगी रोक तुरंत समाप्त की जाए। मौखिक आदेश देने वाले अधिकारी एवं आदेश
लागू करने वाले सिक्योरिटी गार्ड बाबू ख़ान के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि 48 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो संयुक्त प्रेस
क्लब के सदस्य विवश होकर उच्च अधिकारियों, उत्तर प्रदेश सरकार, सूचना आयोग एवं सक्षम
न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे।
इस संबंध में एमडीए सचिव आनंद कुमार ने कहा कि उपाध्यक्ष
वर्तमान में अवकाश पर हैं, उनके लौटने के बाद मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। इस
अवसर पर महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप कुमार, जाहिदा खान, रवि ठाकुर, सचिन भारती, नौशाद
ख़ान, वंशिका शर्मा, सुनील ठाकुर सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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