नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ: स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा संकाय के शिक्षा विभाग द्वारा सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत उत्तम स्वास्थ्य एवं कल्याण तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को ध्यान में रखते हुए “कार्यस्थल पर मानसिक एवं शारीरिक कल्याण हेतु सांस्कृतिक सहभागिता” विषय पर एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर प्रो. संदीप कुमार, संकायाध्यक्ष शिक्षा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए सकारात्मक एवं स्वस्थ कार्य संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. इंदिरा सिंह, विभागाध्यक्षा, शिक्षा विभाग ने मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को कार्यस्थल पर अत्यंत आवश्यक बताते हुए कार्यक्रम की विषयवस्तु का परिचय दिया। डॉ. मंजू अधिकारी, विभागाध्यक्षा, शारीरिक शिक्षा विभाग ने भी ऐसी गतिविधियों को तनावमुक्त एवं ऊर्जावान वातावरण के लिए उपयोगी बताया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित बलून बैलेंस खेल में पुरुष वर्ग से सुनील शर्मा, कार्यालय अधीक्षक एवं गुलबहार, लिपिक तथा महिला वर्ग से दीपिका अग्रवाल, सहायक पुस्तकालयाध्यक्षा एवं फरहा, सहायक लिपिक, राष्ट्रीय कैडेट कोर विजेता रहीं। रोल एक्ट खेल, गैर शैक्षणिक कर्मचारी वर्ग में रेखा एवं सविता ने प्रथम तथा सरोज एवं कमलेश ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। गायन प्रतियोगिता में सुनील शर्मा, कार्यालय अधीक्षक ने प्रथम, ईशा जोहरी, पुस्तकालयाध्यक्षा ने द्वितीय एवं फरहा, सहायक लिपिक, राष्ट्रीय कैडेट कोर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का मूल्यांकन डॉ. रागिनी श्रीवास्तव, सहायक आचार्या तथा कुंती त्यागी, गैर शैक्षणिक कर्मचारी द्वारा किया गया। वेलनेस समिति समन्वयिका शिक्षा विभाग डॉ. रीबा देवी एवं सांस्कृतिक समिति समन्वयिका शिक्षा विभाग डॉ. रेशु रानी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
इसी क्रम में शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के वैश्विक आयामों पर आधारित एक एलुमनी विशेषज्ञ व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। यह व्याख्यान “सीमाओं से परे शिक्षण, चुनौतियाँ, विकास एवं अवसर” विषय पर केंद्रित रहा। व्याख्यान का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा एलुमनी ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। इसके उपरांत संकायाध्यक्ष लेफ्टिनेंट प्रोफेसर संदीप कुमार, शिक्षा विभागाध्यक्षा प्रो. इंदिरा सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पौधारोपण कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। लेफ्टिनेंट प्रोफेसर संदीप कुमार ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक अवसरों के लिए स्वयं को तैयार करने हेतु प्रेरित किया। प्रो. इंदिरा सिंह ने शिक्षण को समाज निर्माण का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा नितिशा राज तल्लूरी रहीं, जिन्होंने शिक्षा विभाग से शिक्षाशास्त्र में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है तथा वर्तमान में कनाडा में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कनाडा की शिक्षण प्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए व्यवहार विश्लेषण, भावनात्मक संतुलन, शैक्षिक तंत्रिका विज्ञान, समावेशी शिक्षा एवं अनुप्रयुक्त व्यवहार विश्लेषण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शिक्षण को एक जिम्मेदारीपूर्ण एवं संवेदनशील दायित्व बताते हुए आजीवन सीखने की प्रवृत्ति अपनाने पर बल दिया। प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन प्रोफेसर अनुज राज द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ तथा लेफ्टिनेंट प्रोफेसर संदीप कुमार द्वारा मुख्य वक्ता को प्रशस्ति स्वरूप सम्मान प्रदान किया गया। इस व्याख्यान का आयोजन एवं संचालन डॉ. रूबी द्वारा किया गया, जो एलुमनी ट्रस्ट की महासचिव, शिक्षा विभाग की एलुमनी प्रभारी एवं कार्यक्रम की संयोजक रहीं।
दूसरी ओर शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा “बौद्धिक संपदा अधिकार एवं इलेक्ट्रॉनिक अधिगम” विषय पर एक ज्ञानवर्धक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. दीपक राघव रहे। इस अवसर पर विभागाध्यक्षा डॉ. मंजू अधिकारी, डॉ. प्रवीण शेरावत, डॉ. निशांत सिंह एवं श्री सरताज उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गैर शिक्षण कर्मचारी, शिक्षण कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की, जिसमें आठ गैर शिक्षण कर्मचारी, शिक्षण स्टाफ की उपस्थिति तथा तैंतीस विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. निशा राणा रहीं, जिन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार एवं इलेक्ट्रॉनिक अधिगम से संबंधित विषयों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कॉपीराइट एवं पेटेंट की अवधारणा, पंजीकरण प्रक्रिया तथा शैक्षणिक एवं शोध कार्यों में उनकी भूमिका पर सरल एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जो सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ।

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