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Friday, December 5, 2025

आरएमजी इस्तेमाल करने वाले लोगों में ऑफशोर गैंबलिंग ऐप्स का उपयोग 68प्रतिशत से बढ़कर 82प्रतिशत हो गया है : रिपोर्ट


नित्य संदेश ब्यूरो 
नोएडा। कट्स इंटरनेशनल ने दिल्ली-एनसीआर में लगभग 1,000 लोगों पर सर्वे किया जो पहले ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग में गेम खेलते थे। सर्वे में पता चला कि भारत में ऐसे गेम पर बैन लगने के बाद लोग अब ज़्यादा विदेशी बेटिंग साइटों पर खेल रहे हैं। यानी बैन लगाने से जुआ कम नहीं हुआ, बल्कि लोग अब बिना नियमों वाली विदेशी साइटों पर ज़्यादा खेल रहे हैं।

कट्स इंटरनेशनल के रिसर्च डायरेक्टर अमोल कुलकर्णी ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर के सर्वे में पता चला कि भारत में ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर बैन लगने के बाद लोग बड़ी संख्या में विदेशी बेटिंग साइटों पर जाने लगे हैं। सर्वे में हर चार में से एक व्यक्ति अब ऐसी विदेशी साइट पर खेल रहा है और पहले से ज़्यादा समय तक और ज़्यादा बार खेल रहा है। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी का गलत और अनचाहा असर है। जिस पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है।

कट्स ने दिल्ली-एनसीआर के उन लोगों से बात की, जो पहले ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग में गेम खेलते थे। इसका उद्देश्य था समझना कि बैन से पहले और बाद में लोगों की गेम खेलने की आदत कैसे बदली। यह सर्वे ऑनलाइन फॉर्म भरवाकर किया गया और इसमें सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के लोग शामिल थे। सर्वे में देखा गया कि लोग कितना खेलते थे, कितना पैसा लगाते थे, कितना समय देते थे, और 1 सितंबर 2025 के बैन के बाद वे कैसे विदेशी बेटिंग साइटों पर चले गए। यह बैन प्रोगा कानून पास होने के कुछ दिन बाद लगाया गया था। नतीजे बताते हैं कि बैन से कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि लोग अब ज़्यादा विदेशी, बिना नियम वाली बेटिंग साइटों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

सर्वे के मुख्य नतीजे: ऑफ़शोर बेटिंग बढ़ी: बैन के बाद विदेशी (ऑफ़शोर) बेटिंग साइटों का इस्तेमाल 68.3प्रतिशत से बढ़कर 82प्रतिशत हो गया। यानी बैन लगने के बाद 13.7प्रतिशत ज़्यादा लोग इन विदेशी साइटों पर खेल रहे हैं, जो लोगों के व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाता है। बैन के बाद भी बने नए यूज़र: सर्वे में हर 4 में से 1 व्यक्ति ने 1 सितंबर 2025 के बाद पहली बार ऑफ़शोर बेटिंग ऐप का इस्तेमाल शुरू किया। 11प्रतिशत लोगों ने खेलना छोड़ दिया है, लेकिन 57.3प्रतिशत लोग अब भी खेल रहे हैं। यह दिखाता है कि बैन के बाद भी लोगों की आदत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

खर्च बढ़ गया: बैन से पहले सिर्फ 7.6प्रतिशत लोग हर महीने 5,000–9,999 खर्च करते थे, लेकिन बैन के बाद यह बढ़कर 26.2प्रतिशत हो गया। इसके अलावा 13.5प्रतिशत लोग अब हर महीने 10,000 से ज़्यादा खर्च कर रहे हैं, जबकि बैन से पहले इस श्रेणी में कोई नहीं था। यानी बैन के बाद लोगों का बेटिंग पर खर्च बहुत बढ़ गया है।

रोज़ाना खेलने वाले बढ़े: अब 42प्रतिशत लोग रोज़ाना विदेशी (ऑफ़शोर) बेटिंग साइटों पर जाते हैं, जबकि बैन से पहले यह सिर्फ 3.4प्रतिशत था। यानी रोज़ाना खेलने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ गई है। लंबे समय तक खेलना बढ़ा: जो लोग हर सत्र में 2 घंटे से ज्यादा खेलते हैं, उनकी संख्या बैन से पहले 3.4प्रतिशत थी, लेकिन अब यह बढ़कर 44प्रतिशत हो गई है। यानी लोग विदेशी साइटों पर पहले से ज़्यादा समय दे रहे हैं।

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि यह बड़ी समस्या बन गई है। बैन लगाने से गेमिंग का खतरा कम होने की बजाय, लोग बिना नियम वाली विदेशी साइटों पर खेलने लगे हैं। इससे नियम और निगरानी कमजोर हुई है, लोगों को पैसे और खेलने के तरीके में खतरा बढ़ गया है और समय के साथ पैसा भी ज्यादा लग रहा है।इसलिए पूरे देश में इसका असर समझने के लिए दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही सर्वे किए रहे हैं, ताकि पता चल सके कि नियम लोगों और मार्केट पर कैसे असर डाल रहे हैं।

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