-हाईकोर्ट ने कहा- रिटायर्ड होने के बावजूद जिम्मेदारी से बच नहीं सकते
तरुण आहूजा
नित्य संदेश, मेरठ। सुप्रीम कोर्ट में सेंट्रल मार्केट के अवैध निर्माण के विरुद्ध अवमानना याचिका स्वीकार होने के बाद आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता आफताब अहमद ने 16 अक्टूबर को पूर्व 22 अधिकारियों और 17 अक्टूबर को 45 अधिकारियों के खिलाफ नौचंदी थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
धारा 217 और 218 आईपीसी के जरिए ये एफआईआर अवैध निर्माण को रोकने में लापरवाही का आरोप लगाती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच जस्टिस चंद्रा धारी सिंह और जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला ने क्रिमिनल मिस रिट याचिका नंबर 25379 और 25336 को 17 और 10 नवंबर को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता रिटायर्ड सुपरीटेंडेंट इंजीनियर अरविंद कुमार और अन्य 67 अधिकारियों ने एफआईआर रद करने और गिरफ्तारी रोकने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा, ये अधिकारी रिटायर्ड होने के बावजूद जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार (2014), सत्येंद्र कुमार ऍटिल (2022) और अन्य फैसलों का हवाला देकर कहा कि धारा 217- 218 के अपराधों में 7 साल तक सजा है, इसलिए पुलिस को बीएनएसएस की धारा 35 (3) यानी 41अ सीआरपीसी का पालन करना होगा। 67 अधिकारियों की दोनों अलग-अलग रिट याचिकाओं में हाईकोर्ट ने यह कहते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया कि प्रश्नगत मामले में वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट के दायरे में
कॉम्प्लेक्स बनवाने वाले इन अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही नकेल कसी है। वर्ष 2024 में कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था, फिर अवमानना पर नोटिस जारी किए थे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट के दायरे में है, इसलिए याचिकाएं नामंजूर की जाती है। राज्य के एडवोकेट जनरल ने विरोध किया, लेकिन कानूनी स्थिति नहीं झुठलाई गई।
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