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Saturday, October 4, 2025

"जहरीली गैसों का ज़हर खत्म करेगी नई तकनीक"


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा और उनकी अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने एक ऐसी अभिनव तकनीक विकसित की है, जो कारखानों और उद्योगों से निकलने वाली जहरीली गैसों को न केवल निष्क्रिय करती है, बल्कि उन्हें उपयोगी रसायनों और ईंधनों में परिवर्तित भी करती है। 

उनकी टीम ने इस दिशा में चार उन्नत विधियों पर कार्य किया, जिनमें से सबसे प्रभावी विधि “विद्युत-रासायनिक कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड अपचयन प्रक्रिया” को चुना गया। इस प्रक्रिया में एक विशेष विद्युत-रासायनिक कोशिका का प्रयोग किया जाता है, जिसमें कारखानों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों को एक द्रव में बुलबुले के रूप में प्रवाहित किया जाता है। जब इस द्रव में विद्युत प्रवाह प्रवाहित किया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड के अणु टूटकर हाइड्रोजन के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और यह तकनीक न सिर्फ जहरीली गैसों को उपयोगी रसायनों में बदलती है, बल्कि साथ ही ऑक्सीजन गैस भी उत्पन्न करती है, जो वातावरण के लिए लाभदायक है। 
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे न केवल वायु प्रदूषण घटता है, बल्कि कारखानों को आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है, क्योंकि बने हुए रसायन आगे यूरिया और डाइमिथाइल कार्बोनेट जैसे औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जा सकते हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का उपयोग अमोनिया के साथ मिलाकर यूरिया बनाने में किया जाता है, जो कृषि के लिए एक आवश्यक उर्वरक है। यह उपलब्धि केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जा रही है। उन्होंने और उनकी टीम ने इस विषय पर दो अत्यंत प्रतिष्ठित शोध पत्र प्रकाशित किए हैं — एक वर्ष 2024 में "मैटेरियल्स टुडे सस्टेनेबिलिटी" नामक पत्रिका में तथा दूसरा वर्ष 2025 में "मैटेरियल्स टुडे" नामक पत्रिका में, जिसका पइंपैक्ट फैक्टर 22 है। ये दोनों शोधपत्र विश्व की सर्वोच्च श्रेणी की पत्रिकाओं में सम्मिलित हैं और विश्वविद्यालय के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि हैं। 

विशेषज्ञों का मत है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर उद्योगों में लागू किया गया, तो यह औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास दोनों के लिए एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगा।

🔬 इस तकनीक के प्रमुख लाभ :
✨इससे कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन, एथेनॉल और फॉर्मिक अम्ल जैसे रसायन प्राप्त होते हैं, जिनका उपयोग उद्योगों में किया जा सकता है।
✨जहरीली गैसों का नाश होता है और ऑक्सीजन निकलती है, जिससे वायु शुद्ध होती है।
✨अपशिष्ट गैसों से उपयोगी पदार्थ बनने के कारण उद्योगों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
✨यह तकनीक जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए एक हरित और स्वच्छ नवाचार के रूप में देखी जा रही है।

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