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Friday, September 5, 2025

शिक्षक दिवस 2025 : भौतिक विज्ञान विभाग में आदर्श, प्रेरणा और स्मृतियों का भावमय संगम




नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग में शिक्षक दिवस का आयोजन अत्यंत गरिमापूर्ण एवं भावनात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह अवसर न केवल शिक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का मंच बना, बल्कि शिक्षा, अनुशासन, स्मृतियों और गुरु-शिष्य संबंधों की एक सुंदर झलक भी प्रस्तुत कर गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना और गायत्री मंत्र के सस्वर उच्चारण से हुआ, जिसने पूरे सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर आधारित एक संक्षिप्त डॉक्युमेंट्री प्रदर्शित की गई, जिसने उनके शिक्षा दर्शन और प्रेरणादायी योगदान को उजागर किया। इसके उपरांत छात्रों द्वारा प्रस्तुत कविताएँ, शायरी, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों के दिलों को छू गए। बीएससी और एमएससी के विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति भावनात्मक अभिव्यक्ति देते हुए उन्हें सम्मानित किया।

कार्यक्रम की एक विशेष प्रस्तुति में छात्रों ने विभाग की पुरानी स्मृतियों और गतिविधियों की झलकियों को वीडियो के रूप में प्रस्तुत किया, जिसने सभी शिक्षकों और छात्रों को भाव-विभोर कर दिया। यह प्रस्तुति एक ऐसे क्षण में परिवर्तित हो गई, जहाँ सभी लोग अतीत की मधुर यादों में खो गए। कार्यक्रम का संचालन अत्यंत प्रभावी ढंग से आयुष ठाकुर एवं शिविका चौधरी द्वारा किया गया।

डॉ. विवेक कुमार नौटियाल ने अपने प्रेरणादायक वक्तव्य में समय के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि "समय सबसे अमूल्य संपदा है — जो इसे साधता है, वह स्वयं को सशक्त करता है।" उन्होंने छात्रों को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हुए समय का सर्वोत्तम उपयोग करने की प्रेरणा दी।
डॉ. कविता शर्मा ने अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान न मानते हुए, एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया बताया।

डॉ. योगेंद्र कुमार गौतम ने विद्यार्थियों एवं 'फिजिक्स संगठन' के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि "ऐसे आयोजनों से शिक्षा में जीवंतता और संवेदनशीलता दोनों जुड़ती हैं।"
डॉ. अनिल कुमार यादव ने शिक्षक की भूमिका को मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए कहा कि "एक अच्छा शिक्षक न जाति देखता है, न पृष्ठभूमि — वह केवल विद्यार्थी की जिज्ञासा और मेहनत को पहचानता है।" उन्होंने छात्रों को अपने शिक्षकों से लगातार जुड़ाव बनाए रखने की सीख दी।
*प्रोफेसर एवं समन्वयक, फिजिक्स संगठन, डॉ. नीरज पवार ने शिक्षा और विद्या के गूढ़ अंतर को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाते हुए कहा कि “शिक्षा जीवन का साधन नहीं, स्वयं जीवन है।” उन्होंने छात्रों को आत्मबोध, साधना और स्वविकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि "शिक्षक दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि हर वह क्षण है जब हम कुछ नया सीखते हैं।" उन्होंने सी.वी. रमन, विक्रम साराभाई और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे प्रेरणादायक शिक्षकों को स्मरण करते हुए विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार मलिक, प्रोफेसर अनुज कुमार, तथा विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक प्रोफेसर बीरपाल सिंह अपने शैक्षणिक उत्तरदायित्वों के कारण कार्यक्रम में भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो सके, परंतु उन्होंने शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए आयोजन की सराहना की और छात्रों को शिक्षा के प्रति निरंतर समर्पण बनाए रखने का संदेश दिया।

इस सम्पूर्ण आयोजन की नींव रहा फिजिक्स संगठन, जिसके अध्यक्ष शोधार्थी पवन कुमार के नेतृत्व में अनस मलिक, सिमरन वर्मा, आदि वर्मा, अंशिका, जीशान, आशीष, रांची, साक्षी, आयुष, वासु, रमन, वरुण सहित सभी छात्र-छात्राओं ने अपने समर्पण, सृजनात्मकता और टीम भावना से कार्यक्रम को अभूतपूर्व सफलता दिलाई।

कार्यक्रम की प्रत्येक प्रस्तुति, प्रत्येक शब्द और प्रत्येक स्मृति ने यह सिद्ध किया कि शिक्षा एक निरंतर यात्रा है, जो केवल कक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे सोचने, जीने और दुनिया को देखने के नजरिए को गढ़ती है। शिक्षक दिवस का यह आयोजन भौतिक विज्ञान विभाग की उच्च स्तरीय अकादमिक परंपरा और मानवीय मूल्यों का प्रतिबिंब बना, जिसे सभी उपस्थितों ने वर्षों तक स्मरणीय रखने योग्य बताया।

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