नित्य संदेश ब्यूरो
बरेली: बरेली में "भास्कर टुडे.कॉम" नामक पंजीकृत ट्रेडमार्क के दुरुपयोग और फर्जी प्रेस कार्ड बांटने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यह खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी धीरेन्द्र सिंह उर्फ धीरू यादव, जो उपजा प्रेस क्लब बरेली के सचिव और बरेली की विधिक अन्वेषण आयोग नामक संस्था के चेयरपर्सन हैं, इन सब गतिविधियों के केंद्र में हैं। आरोप है कि उन्होंने "भास्कर टुडे डॉट कॉम" ट्रेडमार्क का गलत इस्तेमाल कर इसे बदनाम करने और इसके असली मालिक को आर्थिक व सामाजिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
पंजीकृत ट्रेडमार्क का दुरुपयोग और फर्जीवाड़ा पीड़ित राजीव कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि "भास्कर टुडे डॉट कॉम" एक पंजीकृत ट्रेडमार्क है, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 5172820 है। राजीव कुमार इसे "भास्कर टुडे डॉट कॉम" नामक न्यूज पोर्टल के लिए इस्तेमाल करते हैं, जो वर्ष 2021 से सक्रिय है। राजीव कुमार के अनुसार, धीरेन्द्र यादव ने इस ट्रेडमार्क की नकल कर एक फर्जी वेबसाइट बनाई और इसके नाम पर उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फर्जी प्रेस कार्ड वितरित किए। इतना ही नहीं, आरोपी ने "भास्कर टुडे" के नाम से फर्जी आरएनआई (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) नंबर का भी इस्तेमाल किया। यह सब केवल ट्रेडमार्क की छवि को धूमिल करने और राजीव कुमार को आर्थिक रूप से कमजोर करने के उद्देश्य से किया गया।
आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज हैं कई गंभीर मामले
यह मामला अकेला नहीं है। आरोपी धीरेन्द्र यादव के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाना, और धमकी देने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी के खिलाफ बरेली के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों में निम्नलिखित शामिल हैं:
1. थाना कोतवाली:
मुकदमा संख्या 0155/2022
आईपीसी की धारा 504 और 506 (धमकी देना)
2. थाना कोतवाली:
मुकदमा संख्या 0407/2023
आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जी दस्तावेज बनाना), 468 (धोखाधड़ी के इरादे से फर्जी दस्तावेज बनाना), और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग)
3. थाना बिथरी चैनपुर:
मुकदमा संख्या 0405/2022
आईपीसी की धारा 420, 468 और 506
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश पर जांच जारी
पीड़ित ने इस मामले को लेकर पहले भी कई बार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अंततः वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश पर क्षेत्राधिकारी हाइवे द्वारा जांच कराई गई। जांच के बाद थाना बिथरी चैनपुर में धीरेन्द्र सिंह उर्फ धीरु यादव एवं कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318 (4) और 336 (3) (धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, इलैक्ट्रोनिक दस्तावेज में छेड़छाड़) में एफआईआर दर्ज की गई है जल्द ही अज्ञात लोगों का खुलासा किया जाएगा और अब पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
कैसे हो रहा है ट्रेडमार्क और प्रेस कार्ड का दुरुपयोग?
शिकायत के अनुसार, धीरेन्द्र यादव ने "भास्कर टुडे" ट्रेडमार्क के नाम से फर्जी प्रेस कार्ड जारी किए, जिनका उपयोग उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में किया जा रहा है। उन्होंने "भास्कर टुडे" के नाम से स्टीकर भी बनवाए और खुद को "भास्कर टुडे" का प्रतिनिधि बताकर लोगों को गुमराह किया। आरोपी ने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर जनता के साथ धोखाधड़ी की और राजीव कुमार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
पीड़ित की मांग: सख्त कार्रवाई हो
राजीव कुमार ने मांग की है कि इस गंभीर मामले में तत्काल सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि धीरेन्द्र यादव जैसे व्यक्ति का इस प्रकार का फर्जीवाड़ा न केवल उनके व्यवसाय और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि प्रेस और मीडिया की छवि को भी खराब कर रहा है। पीड़ित ने बताया की उसे आरोपियों से जान माल का खतरा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार के अपराधों पर रोक लग सके।
ट्रेडमार्क और प्रेस की साख पर गंभीर सवाल
यह मामला केवल ट्रेडमार्क के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेस और मीडिया के नाम पर जनता को गुमराह करने की कोशिश का एक बड़ा उदाहरण भी है। फर्जी प्रेस कार्ड, फर्जी वेबसाइट और फर्जी आरएनआई नंबर जैसे कृत्य मीडिया की साख को कमजोर करते हैं। अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। इस तरह के मामलों में देरी न केवल पीड़ित को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि अपराधियों को और अधिक बढ़ावा देती है। यह मामला व्यापारिक नैतिकता, प्रेस की गरिमा और कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
शहर में इस मामले को लेकर मीडिया और आम जनता के बीच तीव्र चर्चा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या कानून ऐसे लोगों पर शिकंजा कस पाएगा, जो कानून और व्यवसायिक प्रतिष्ठा का मजाक उड़ाते हैं। यह मामला न केवल पंजीकृत ट्रेडमार्क के दुरुपयोग का है, बल्कि मीडिया की गरिमा को भी चोट पहुंचाने का प्रयास है। अगर इस पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह व्यापार और पत्रकारिता जगत के लिए एक खतरनाक उदाहरण बन सकता है।
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