नित्य संदेश ब्यूरो
नई दिल्ली। शिवराम पार्क नांगलोई में नत्थूराम कॉन्वेंट स्कूल के सौजन्य एवं काव्य शोध संस्थान के तत्वावधान में यशस्वी कवि स्वर्गीय डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती के 104वें जन्मोत्सव पर "राष्ट्र वंदन कवि सम्मेलन" का आयोजन किया गया। जाने-माने शिक्षाविद रविन्द्र लाकड़ा नें माँ सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि नजफगढ़ जोन के चेयरमैन अमित खड़खड़ी थे।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय गीतकार डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती के शिष्य राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य ने की तथा कार्यक्रम का संचालन अनिल बाजपेई ने किया। मुख्य अतिथि अमित खड़खड़ी ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, कवि समाज का दर्पण होता है, वह युग दृष्टा व युग सृष्टा होता है, वह समाज में व्याप्त घटनाओं पर अपनी पैनी नज़र रखता है और देश और समाज का दर्द वह अपनी कविताओ में लाकर भटकों को सही मार्ग दिखाता है तथा देश के सोये जननायकों को भी जगाता है, इसलिए कवि का स्थान हमारे सामाजिक जीवन में सर्वोपरि है। कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री सरला मिश्रा द्वारा सुनाई सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर काव्य में अपनी विशिष्ट सेवा के लिए ओज कवि-गीतकार डॉ अनिल वाजपेई को डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती शिखर सम्मान अमित खड़खड़ी ने अपने हाथों से प्रदान किया।
अलीगढ़ के ओजस्वी कवि वेद प्रकाश 'मणि' ने देश की प्रति अपनी कविताओ से सभी को आंदोलित करते हुए कहा-
अब तो लड़ना होगा हमको आस्तीन के सांपों से
सांपों के फन कुचलेंगे अब तो उनके बापों के
देशद्रोहियों हिंद में रहकर पाक की भाषा बोल रहे
सबक सिखाया जाएगा गर फिर से ऐसे बोल कहे
होश में आओ पत्थर बाजो, वरना मारे जाओगे।
युवा कवयित्री सरला मिश्रा की इस कविता को तालियो की गड़गड़ाहट के साथ सुना गया-
बिना सूरज कभी गहरा अंधेरा छट नहीं सकता
अगर है प्यार सच्चा तो किसी से पट नहीं सकता
मिलेंगी मुश्किलें तनहाइयां चिंता निराशा है
मगर सच्चाइयों का बाल कभी भी घट नहीं सकता।
ओज के कवि अनिल वाजपेई की इन पंक्तियों ने श्रोताओं के मन में देशभक्ति का संचार किया-
सितारा एक टूटे तो गगन खाली नहीं होता
झरे गर फूल कोई तो चमन खाली नहीं होता
हमारी माँ के दामन में है लाखों लाल शेखर से
सपूतों से कभी मेरा वतन खाली नहीं होता।
हास्य-व्यंग्य कवि देवेंद्र दीक्षित शूल सिकंद्राराऊ ने अपनी हास्य-व्यंग्य कविताओं से सभी को हँसा-हंसा के लोटपोट कर दिया-
सबसे बड़ी दफा, दफा दफा। चमचागिरी की दुकान नफा ही नफा
उनकी इन पंक्तियों को भी सराहा गया।
चारों तरफ हों शूल, मत दामन बचाइए
आप भी गुलाब जैसे मुस्कुराइए।
श्रीवस्ती उत्तर प्रदेश से पधारे गीतकार मनोज मिश्रा कप्तान की इन पंक्तियों ने श्रोताओं की खूब वाह-वाही लूटी-
हर रिश्ता तार-तार हो जाता है
दुराचार ही समाचार हो जाता है
जब धरती करती है त्राहिमाम भगवन
निराकार तब नराकार हो जाता है।
कौशांबी से आए युवा कवि सुजीत जायसवाल'जीत' की कविताओं की इन पंक्तियों को भी श्रोताओं की भरपूर दाद मिली-
निज हथेली में मेहंदी लगा लीजिए
हो फिदा मर न जाऊँ बचा लीजिए
प्रेम की नव कली खिल गई उर मेरे
हर इशारों पे मुझको नचा लीजिए।
मेरठ के जाने माने मधुर गीतकार डॉ. सुदेश यादव दिव्य की इन पंक्तियों ने सभी को झुकाकर रख दिया-
संभलकर बोलना हमसे बहुत मुँहजोर हैं हम भी
बुलंदी पर खड़े तुम तो आता दौर हैं हम भी
डुबाने के सनम तेवर दिखाना सोचकर हमको
अगर दरिया तुम्हें कहते तो गोता खोर हैं हम भी।
अन्त में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय गीतकार डॉ.जयसिंह आर्य नें अपने राष्ट्रीयता से ओतप्रोत मुक्तक, गीत, ग़ज़लें सुनाकर भारत का गुणगान किया-
स्वरों की तान है मेरा भारत
रसो की खान है मेरा भारत
वेद, गीता, पुराण से महका
एक उद्यान है मेरा भारत।
इस अवसर पर हिन्दी सेवी सत्यम शर्मा, अनूप शर्मा, पूनम समोर, संजय शर्मा, प्रवीण गोयल, सुनीता शर्मा, डॉक्टर गोपाल, मनीष कुमार खुराना, राम अवतार को मुख्य अतिथि अमित खड़खड़ी व रविन्द्र लाकड़ा ने प्रतीक चिन्ह, शाल व पुष्प माला से सभी का अभिनंदन किया। कवि सम्मेलन की अपार सफलता पर स्वागताध्यक्ष रविन्द्र लाकड़ा नें सभी अतिथियों, श्रोताओ व कवियों का आभार प्रकट किया।
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