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Tuesday, September 17, 2024

ब्रेस्ट कैंसर का नया इलाज: सर्जरी में प्रगति से मिल रही है नई ज़िंदगी

हर 28 में से 1 महिला को हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा

बिनीत कुमार राय
नित्य संदेश, नोएडा। ब्रेस्ट कैंसर भारत में तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है और महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुका है। 2022 में, भारत में ब्रेस्ट कैंसर के कारण 98,337 मौतें हुईं, जिससे यह साफ हो गया कि इसकी रोकथाम और इलाज के लिए जागरूकता और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता है। हर 28 में से 1 महिला अपने जीवनकाल में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हो सकतीं हैं।

सौभाग्य से, ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में अब बहुत प्रगति हो चुकी है, खासकर सर्जिकल तकनीकों में। अब सर्जरी का उद्देश्य ट्यूमर को सटीकता से हटाने के साथ-साथ कॉस्मेटिक परिणामों को भी बेहतर बनाना है, जिससे मरीजों की जीवन में सुधार हो सके। ब्रेस्ट कंजर्वेशन तकनीक से ट्यूमर हटाने के बाद ब्रेस्ट का आकार बरकरार रखने में मदद मिलती है, जिससे मरीज की प्राकृतिक रूप-रेखा बनी रहती है।

डॉ. परवीन मेंदिरत्ता, हेड ऑफ डिपार्टमेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, यथार्थ अस्पताल, ग्रेटर नोएडा ने कहा, "ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में अब नए सर्जिकल विकल्प उपलब्ध हैं, जिनसे मरीजों को बेहतर परिणाम मिलते हैं। इन तकनीकों से न केवल कैंसर का सटीक इलाज हो रहा है, बल्कि सर्जरी के बाद मरीज की जीवनशैली और आत्मविश्वास में भी सुधार हो रहा है। भारत में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए, इन बेहतरीन तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।"

सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी की मदद से अब उन लिम्फ नोड्स को हटाया जाता है जहां कैंसर के फैलने की सबसे ज्यादा संभावना होती है। इससे लिम्फेडेमा जैसी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है। आधुनिक सर्जरी में अब रोबोटिक असिस्टेड तकनीक का भी इस्तेमाल हो रहा है, जिससे छोटे चीरे के साथ सटीकता से सर्जरी की जा रही है।

इंट्राऑपरेटिव रेडिएशन थेरेपी, एक नई और बेहतर तकनीक है, जिसमें सर्जरी के तुरंत बाद ट्यूमर के स्थान पर रेडिएशन दिया जाता है। इससे रेडिएशन थेरेपी के समय में कमी आती है और स्वस्थ टिशू को नुकसान कम होता है। ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन में भी कई नए विकल्प आ गए हैं, जिससे अब मरीज अपनी प्राकृतिक सुंदरता को बेहतर तरीके से बरकरार रख सकती हैं।

ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी अब पहले से ज्यादा सटीक और मरीज-केंद्रित हो गई है, जिससे रिकवरी में भी तेजी आई है। जैसे-जैसे रिसर्च और टेक्नोलॉजी में प्रगति हो रही है, भविष्य में यह तकनीकें और भी प्रभावी होंगी, जिससे मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल सकेगा। हर महिला के लिए इलाज को और व्यक्तिगत बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे सर्जरी के बाद का जीवन ज्यादा सकारात्मक और उम्मीद भरा हो सके।

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