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Saturday, September 14, 2024

महावीर के छात्रों ने स्टॉल के मध्य से समझाया, क्यों है हिंदी देश के माथे की बिंदी

मनीष राणा 
नित्य संदेश, मेरठ : भारत में बंगाली, गुजराती, पंजाबी सहित कई भाषाएं है जो अलग अलग प्रदेशों में बोली जाती हैं। इन सभी भाषाओं को आपस में बांधने का काम हिंदी करती है। इसलिए ही हिंदी को देश के माथे की बिंदी कहा जाता है। यह बात प्रदर्शित करने के लिए सरधना रोड स्थित महावीर यूनिवर्सिटी में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विश्विद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा विभिन्न भारतीय भाषाओं के स्टॉल लगाए गए। 

स्टॉल के मध्य से छात्रों ने विभिन्न स्थानों पर बोली जाने वाली भारतीय भाषाएं, वहां की संस्कृति, रितिरिवाज, साहित्य और वेशभूषा से रूबरू कराते हुए ज्ञानवर्धन किया । इस दौरान वाणिज्य विभाग की छात्रा प्रिया, अंशिका,खुशी, विधि, साधी और सुहेल द्वारा प्रदर्शित गुजरात और गुजराती के स्टॉल को प्रथम घोषित किया गया। कला और मानविक विभाग द्वारा लगाए गए बंगाल और बंगाली के स्टॉल को द्वितीय और शिक्षा विभाग द्वारा लगाए उत्तर प्रदेश और हिंदी के स्टॉल को तृतीय चुना गया। हिन्दी के प्रति छात्रों का ज्ञान परखने और माहौल को रोचक बनाने के लिए मुहावरा प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमे हिंदी के प्रसिद्ध मुहावरों को बोलकर छात्रों से उनका अर्थ पूछा गया। जिसमे कृषि विभाग के छात्र वंश सोम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। लॉ विभाग की छात्रा निष्ठा ने सरस्वती वंदना की। 

इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। जिसमे बीएड की छात्रा मीनू और बीए की छात्रा सिमरन ने नृत्य की प्रस्तुति दी। वही हिंदी का इतिहास और विस्तार विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में बीएबीएड की छात्रा रुचि को विजेता चुना गया। डीन शिक्षा विभाग प्रो० डाँ० शिवपाल सिंह ने इस दौरान स्वरचित हिन्दी कविता का पाठ किया।

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