नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। अनंत चतुर्दशी के विशेष पूजन के समय सदर दुर्गाबाड़ी स्थित जैन मंदिर में विवाद हो गया। जैसे ही रथयात्रा की बोलियां प्रारंभ हुई, जैन समाज के प्रतिष्ठित सर्राफ प्रेम चंद जैन ने विधानाचार्य से माईक लेकर वर्तमान व्यवस्था देख रहे मृदुल जैन पर आरोप लगा दिए। आरोप था कि उन्होंने मंदिर का लाखों रुपया गबन किया है।
उन्होंने कहा, जब संजय जैन सीए द्वारा न्यायालय में सुनील जैन एवं मृदुल जैन के विरुद्ध मुकदमा चल रहा है, साथ ही शासन ने मंदिर समिति को भंग कर दिया था तो किस अधिकार से समाज के पैसों का रखरखाव मृदुल जैन कर रहे हैं। अक्षत जैन सर्राफ ने कहा, मंदिर का एक किलो सोना भी मृदुल जैन के पास है, जिसका कोई लेखा जोखा नही दिया गया। मंदिर की संपत्ति एवं धन कोई निजी रूप से अपने पास रखने का अधिकारी नही है। वहीं सचिन जैन ने भी कहा, मृदुल जैन ने पंचकल्याणक के पैसों का भी कोई दस्तावेज आज तक नही दिया, न ही पिछले तीन वर्षों का मंदिर के आय व्यय का हो कोई विवरण उनके द्वारा दिया गया है।
इस बात पर विवाद बढ़ने लगा।
मृदुल जैन ने कहा, जब तक ऋषभ अकादमी का हिसाब समाज के सामने नहीं आएगा, कोई उनसे किसी भी प्रकार का हिसाब मांगने का अधिकारी नही है। विवाद को बढ़ते देख कवि सौरभ जैन सुमन ने बीचबचाव किया। उन्होंने दोनो पक्षों को शांत करते हुए कहा, मामला अभी न्यायालय में है, बावजूद उसके किसी भी समाज को चलाने के लिए एक समिति की आवश्यकता होती है। जब तक न्यायालय कोई निर्णय नहीं दे देता है तब तक ग्यारह सदस्यों के एक वैकल्पिक समिति गठित कर दी जाए, जो मंदिर की तमाम गतिविधियां देखेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए समाज के प्रतिष्ठित पांच व्यक्तियों का चयन किया जाए जो पंच बनकर एक समिति गठित करेंगे, जो आगे के समस्त कार्य देखेगी।
सौरभ सुमन ने कहा, मृदुल जैन तब तक पिछले चार वर्षों का पूर्ण हिसाब किताब लिखकर मंदिर में टांग दें। और आज के बाद से कोई भी लेनदेन का अधिकार मृदुल जैन के पास शेष नहीं रहेगा। इसका निर्णय पंच करेंगे कि धन की व्यवस्था कैसे करनी है, उसका संचय आदि कौन करेगा।
इस बात को सर्वसहमति से स्वीकार किया गया। तत्काल पांच पंच नियुक्त किए गए। जिनमें विनोद जैन (बूरा वाले), पवन जैन विधानाचार्य, जिनेद्र कुमार जैन, अनिल जैन बंटी एवं प्रेम चंद जैन सर्राफ रहेंगे।
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