-पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
में मनाया गया हिन्दी दिवस
पारस खंडूजा
नित्य संदेश, मेरठ। विद्या नॉलेज पार्क के
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में हिन्दी दिवस पखवाड़ा के तहत हिन्दी दिवस
हर्षोल्लास से मनाया गया। पत्रकारिता के तीनों वर्ष के विद्यार्थियों ने गीत, कविता, नृत्य, सुविचार, लघु नाटिका, हिन्दी ज्ञान आदि के साथ कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। वक्ताओं ने विचार
व्यक्त किया कि भारतीय संस्कृति के संवर्धन में हिन्दी का बड़ा योगदान है। सच्ची
अभिव्यक्ति अपनी भाषा में ही संभव है। इस मौके पर सभी ने हिन्दी भाषा के ज्ञान को
बढ़ाने का संकल्प लिया।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में हिन्दी पखवाड़े में आयोजित हिन्दी दिवस पर
सर्वप्रथम दीप प्रज्ज्वलित कर मां सरस्वती को नमन किया। विद्या नॉलेज पार्क की
परंपरा के तहत विद्यागान हुआ। कॉलेज की निदेशिका डॉ.रीमा वार्ष्णेय एवं
विभागाध्यक्ष डॉ. ममता भाटिया ने सभी को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिन्दी में अभिवादन के साथ हुआ। प्रथम वर्ष की छात्रा
दिव्यांशी धनक ने सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। माही शारदा और
रजत उज्ज्वल ने बताया कि हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं। वहीं विदुषी जैन, स्तुति शर्मा, हर्षित बुद्धिराजा ने हिन्दी
भाषा से ओत-प्रोत कविता तो मिताली सिंह रघुवंशी ने सुविचार प्रस्तुत किये। हिन्दी
भाषा के महत्व पर एक लघु नाटिका का मंचन किया गया जिसमें रजत उज्ज्वल, स्तुति शर्मा, अंजली, मान्या, निवेदित और आर्यन ने हिस्सा
लिया। इसमें बताया कि हिन्दी भाषा का सही ज्ञान होना चाहिए। हिन्दी के ज्ञान की
परीक्षा को लेकर कई खेल खेले गये। हिन्दी मुहावरे बड़े बावरे हैं इस पर सभी छात्रों
ने मिलकर प्रस्तुति दी।
इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. ममता भाटिया ने कहा कि हिन्दी बोलचाल की भाषा है
और इसके बिना हम अपने विचारों को पूर्णतः व्यक्त नहीं कर सकते। सहायक प्रवक्ता
सूरज देव प्रसाद ने कहा कि अंग्रेजी का ज्ञान श्रेष्ठ है, लेकिन हिन्दी का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ है। यदि हम चाहते हैं कि भारत का नाम पूरी
दुनिया में हो तो इसके लिए संस्कृति और हिन्दी भाषा का परचम पूरी दुनिया में
लहराना होगा। हमें हिन्दी पर गर्व करना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन बीएजेएमसी प्रथम वर्ष की छात्रा इशिका शर्मा और पीयूषी
शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। हिन्दी पर खेल का संचालन सुर्वणा शर्मा, पीयूषी शर्मा और मान्या सिंघल ने किया। तकनीकी रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने
में फैकल्टी अविनाश कुमार का योगदान रहा। इस मौके पर तीनों वर्ष के विद्यार्थी
मौजूद रहे।
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