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Thursday, September 26, 2024

आई-क्यू कर रहा हर साल एक करोड़ लोगों का इलाज



दुनिया के बेस्ट आई हॉस्पिटल में जल्द हो सकता है शुमार

 नित्य संदेश ब्यूरो

सहारनपुर: यह महान उपलब्धि आई-क्यू द्वारा किये जा रहे विभिन्न उपचारों के जरिए हासिल हो पाई है, जिसमें रेटिना सर्जरी, रेटिना केयर, लेसिक सर्जरी, ग्लूकोमा मैनेजमेंट, आईसीएल प्रोसीजर, स्क्विंट सर्जरी, ऑकुलोप्लास्टी, ऑप्टिकल सर्विस और अन्य आंखों की देखभाल से जुड़ी अन्य समस्याएं हैं। आई-क्यू के को-फाउंडर और सीईओ राजत गोयल ने बताया, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर और नाइजीरिया सहित विभिन्न हिस्सों के रोगी आई-क्यू के एडवांस ट्रीटमेंट के लिए यहां आ रहे हैं और उन्हें अस्पताल द्वारा बेहतर इलाज दिया जा रहा है। यहां सबसे ज्यादा पीड़ित मोतियाबंद सर्जरी, लेसिक प्रोसीजर और ग्लूकोमा उपचार के लिए आ रहे हैं।

देश के आंखों के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक आई-क्यू सुपर-स्पेशियलिटी आई हॉस्पिटल ने सालाना एक करोड़ से अधिक रोगियों का इलाज करके इतिहास रच दिया है।

श्री गोयल ने बताया, इससे पता चलता है कि Eye-Q को सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में पहचान मिली है। दुनियाभर में करोड़ों लोग आंखों से जुड़े इसके सस्ते और सुलभ इलाज का फायदा ले रहे हैं। इस ग्रुप ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूरी दुनिया में एक अलग पहचान बनाई है। इस उपलब्धि तक पहुंचने में Eye-Q द्वारा दी जाने वाली मेडिकल सेवाओं का बड़ा योगदान है। हॉस्पिटल द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में मोतियाबिंद सर्जरी, रेटिना केयर, लेसिक सर्जरी, ग्लूकोमा मैनेजमेंट, आईसीएल प्रोसीजर, स्क्विंट सर्जरी, ओक्यूलोप्लास्टी, ऑप्टिकल सर्विस और आंखों से जुड़े अन्य देखभाल और इलाज  हैं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर और नाइजीरिया सहित विभिन्न हिस्सों के रोगी आई-क्यू के एडवांस ट्रीटमेंट के लिए यहां आ रहे हैं और उन्हें अस्पताल द्वारा बेहतर इलाज दिया जा रहा है। यहां सबसे ज्यादा पीड़ित रेटिना  सर्जरी, लेसिक प्रोसीजर और ग्लूकोमा उपचार के लिए आ रहे हैं।

आई-क्यू के को-फाउंडर और सीईओ राजत गोयल ने इस महान उपलब्धि पर बातचीत करते हुए कहा, 'सालाना एक करोड़ से अधिक रोगियों को पार करना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो आंखों की देखभाल बेहतर देखभाल, सस्ते और सुलभ इलाज उपब्ध कराने के हमारे अटूट ध्यान को दर्शाता है। यह हमारे लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है, क्योंकि हम भारत के अलावा पूरी दुनिया में आंखों की देखभाल करने के अपने मिशन को पूरा करना जारी रखते हैं। इस क्षेत्र में हम नई तकनी का सहारा ले रहे हैं और हर स्थिति में बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कोई भी पीड़ित इलाज से वंचित न रहे।

 

आई-क्यू के फाउंडर और सीएमडी डॉक्टर अजय शर्मा ने अस्पताल की उपलब्धि पर अपनी बात रखते हुए कहा, 'सालाना एक करोड़ से अधिक रोगियों का इलाज करना हमारे रोगियों का हमारे प्रति विश्वास का एक गहरा प्रमाण है। यह न केवल हमारी मेडिकल एक्सपर्टाइज्ड की क्वालिटी को दर्शाता है, बल्कि आई-क्यू में प्रत्येक व्यक्ति के विश्वास को भी दर्शाता है। मैं अपनी पूरी टीम का हार्दिक धन्यवाद करता हूं - हमारे असाधारण डॉक्टरों और नर्सों से लेकर हमारे प्रशासनिक कर्मचारियों तक, सभी का इस शानदार उपलब्धि में बड़ा हाथ है। यह उपलब्धि उनके कठिन मेहनत और अटूट विश्वास के बिना संभव नहीं होती। आगे भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच को ज्यादा आसान और सुलभ बनाएंगे।

आई-क्यू की सारी ताकत अपनी स्टेट ऑफ द आर्ट टेक्नोलॉजी में है, जो हाइली ट्रेंड मेडिकल एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर काम करती है। आई-क्यू ने ब्लेडलेस रेटिना सर्जरी के लिए फेम्टो लेजर सिस्टम जैसी बेहतर तकनीकों का इस्तेमाल किया है, जिससे बेहतर इलाज और जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। इनकी एलिटा (SILK) आई करेक्शन टेक्नोलॉजी लेसिक और स्माइल प्रोसीजर से आगे निकल जाती है, इससे रोगियों को बेहतर रिजल्ट मिलता है। इसके अलावा हाई रिज़ॉल्यूशन रेटिना इमेजिंग और ऑप्टिकल कोहरेन्स टोमोग्राफी (ओसीटी) जैसे इलाज से मैकुलर डिजेनेरेशन और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी स्थितियों का जल्दी पता लगाने और निदान करने में मदद मिलती है जिससे रोगी की देखभाल और उपचार की सफलता बढ़ जाती है।

अपनी सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आई-क्यू भारत में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में 30 जबकि विदेश में नाइजीरिया में तीन अस्पताल चला रहा है। यहां कैशलेस मेडिक्लेम सर्विस और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के जरिए भी इलाज करवाया जा सकता है। इससे कमजोर वर्गों को बेहतर इलाज कराने में मदद मिलती है। आई-क्यू की रणनीतिक रूप से टियर II और III शहरों में अस्पताल बनाने से इसकी पहुंच बढ़ी है।

हर साल 1 करोड़ मरीजों की सेवा करने की Eye-Q की यात्रा को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से जोड़ना गलत नहीं होगा। इस अस्पताल ने कई जनकल्याण पहल चलाई हैं, जिनमें घर-घर जाकर आंखों की जांच कार्यक्रम, फ्री आई चेक-अप कैंप और आंखों की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हेल्थ मैराथन शामिल हैं। आई-क्यू का मकसद सस्ते और सुलभ इलाज पर ध्यान केंद्रित करना है ताकि कमजोर वर्ग के लोग भी आंखों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं का फायदा उठा सकें और उन्हें निःशुल्क या सब्सिडी वाले उपचार प्रदान किए जाएं।

अगर भविष्य की बात करें, तो आई-क्यू ग्रोथ और इनोवेशन को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है। संस्थान का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में अपने नेटवर्क का विस्तार करके हर साल तीन अस्पताल बनाना है ताकि उस समय के दौरान सालाना XX रोगियों की सेवा की जा सके। इसके अलावा  आई-क्यू रोगियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ बेहतर परिणाम देने और इस क्षेत्र अपमी सेवाओं को मजबूत करने के लिए नए उपचार और तकनीकों पर काम कर रहा है।

आई-क्यू सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल के बारे में आई-क्यू सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल (आई-क्यू विजन प्राइवेट लिमिटेड) की स्थापना 2007 में हुई थी। इसके हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में 30 से ज्यादा सुपर स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल हैं। इनके अलावा अफ्रीका के नाइजीरिया में भी तीन हॉस्पिटल हैं। आई-क्यू किफायती कीमतों पर हाई कौलिटी वाली आंख देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए समर्पित है, जो एक आईएसओ 9001:2015 प्रमाणित इकाई के रूप में काम करता है। आई-क्यू के संस्थापक और सीएमडी डॉक्टर अजय शर्मा के नेतृत्व में और देश के शीर्ष अस्पतालों से आए हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ, आई-क्यू मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए वचनबद्ध है। आई-क्यू का लक्ष्य भारत का सबसे बड़ा आंखों का अस्पताल बनना है, जहां मरीजों को बेहतर इलाज मिले और सबसे ज्यादा मरीज आएं। आई-क्यू का मिशन है कि हर मरीज उनके अस्पताल का ब्रांड एंबेसडर बने। इसके लिए वे आंखों के इलाज में सबसे अच्छी तकनीक का इस्तेमाल करेंगे और मरीजों को पूरा ध्यान देंगे। ज्यादा जानकारी के लिए आप आई-क्यू इंडिया की वेबसाइट देख सकते हैं।


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