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Sunday, May 31, 2026

“सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य” : सुभारती लॉ कॉलेज ने बच्चों को पॉक्सो कानून की दी महत्वपूर्ण जानकारी


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा “जागृति – लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO)” विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य” का आयोजन ईश्वर चंद्र विद्यासागर श्रमिक बाल विद्यालय, सुभारतीपुरम, मेरठ में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), मेरठ के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा लैंगिक अपराधों से संरक्षण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराना था।

यह विशेष जागरूकता कार्यक्रम सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायमूर्ति), इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के निर्देशन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्षा, सुभारती लॉ कॉलेज के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान लॉ क्लब की संयोजिका डॉ. सारिका त्यागी ने बच्चों को सरल एवं संवादात्मक शैली में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण, छेड़छाड़, उत्पीड़न तथा पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले किसी भी प्रकार के यौन अपराध पर इस कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाती है तथा अपराध की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग दंड निर्धारित किए गए हैं।



डॉ. त्यागी ने बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बीच अंतर भी समझाया। उन्होंने बताया कि माता-पिता का स्नेहपूर्ण आलिंगन, सिर पर हाथ फेरना या पीठ थपथपाना जैसे व्यवहार बच्चों को सुरक्षा और अपनत्व का अनुभव कराते हैं, जबकि किसी भी प्रकार का ऐसा स्पर्श जो डर, असहजता या भय उत्पन्न करे, ‘बैड टच’ की श्रेणी में आता है। उन्होंने बच्चों को यह भी समझाया कि ऐसी किसी भी स्थिति में चुप न रहें और तुरंत अपने माता-पिता, बड़े भाई-बहन, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें।


कार्यक्रम में शालिनी गोयल ने पॉक्सो अधिनियम के कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और दोषी पाए जाने पर कठोर दंड का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि अपराध की गंभीरता के आधार पर न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। उन्होंने बच्चों को यह भी बताया कि यदि वे स्वयं या उनका कोई परिचित यौन शोषण का शिकार होता है, तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराना, हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करना तथा विद्यालय के शिक्षकों को जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि “बताइए जरूर, चुप मत रहिए।”


इस अवसर पर ईश्वर चंद्र विद्यासागर श्रमिक बाल विद्यालय की प्राचार्या किरण का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को बच्चों के समग्र विकास और सुरक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। जागरूकता सत्र ने बच्चों को न केवल उनके अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी, बल्कि उन्हें सुरक्षित एवं सशक्त भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।

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