नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। अमर बलिदानी भगत सिंह की जन्म जयंती के अवसर पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय
के इतिहास विभाग एवं साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन इतिहास विभाग स्थित वीर बंदा बैरागी
सभागार में किया गया।
कार्यक्रम
के मुख्य वक्ता हरियाणा सरकार में हायर एजुकेशन विभाग में डिप्टी डायरेक्टर से सेवानिवृत
प्रोफेसर जसबीर कौर रही। विशिष्ट अतिथि के रूप में इतिहास में गहरी रुचि रखने वाले
अनेक पुस्तकों के लेखक अमित राय जैन और उत्तर प्रदेश न्यूज़ टाइम्स नोएडा के पंकज
पाराशर रहे। अध्यक्षता प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता ने की। कार्यक्रम का आरंभ मां
सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ सभी अतिथियों ने किया। इतिहास की छात्रा
ज्योति ने सरस्वती वंदना की और कुश गिरी और शिवानी ने मेरा रंग डे बसंती चोला गीत
गया। स्वागत भाषण इतिहास विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर केके शर्मा ने देते हुए कहा कि आज
इस कार्यक्रम में आए सभी अतिथि अपने-अपने क्षेत्र के विद्वान और सौम्य व्यक्तित्व के धनी है।
प्रोफेसर एवी कौर ने कार्यक्रम की विषय स्थापना करते हुए ऐसे कार्यक्रम के महत्व
पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. जसबीर कौर ने अपने वक्तव्य
में कहा कि भगत सिंह का जीवन प्रेरणा स्रोत है, वह बचपन से
ही देशभक्त थे। मात्र 13 वर्ष की आयु में ही घर से स्कूल के
लिए निकले, किंतु स्कूल ना पहुंचकर सीधे जलियांवाला बाग
पहुंचे और वहां के शहीदों की मिट्टी अपनी स्कूल की पानी की बोतल में भरी और वापस
घर लौट आए। कहा जाता है कि भगत सिंह ने इसी समय जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला
लेने की शपथ ली थी। डॉक्टर कौर ने कहा कि उनके बचपन से लेकर जवानी तक की अनेक ऐसे
प्रसंग हैं, जो आज के युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बने
हुए हैं। भगत सिंह की शादी को लेकर डॉक्टर कौर ने बताया कि वह कहां करते थे कि
मेरे जीवन का लक्ष्य मां भारती के गुलामी की जंजीरों को तोड़कर मुक्त करना है, मृत्यु ही मेरी दुल्हन है और शव के पीछे चलने वाले मेरे बाराती। डॉ. कौर ने भगत सिंह के विचारों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।
विशिष्ट
अतिथि के रूप में इतिहास अध्ययता अमित राय जैन ने कहा कि भगत सिंह की प्रत्येक बात
प्रत्येक गतिविधि देश के लिए समर्पित थी। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश के लिए
कुर्बान कर दिया बिना किसी स्वार्थ के। भगत सिंह हमेशा युवाओं के लिए प्रेरणा
स्रोत बने रहेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पंकज पराशर ने आज के युवा पीढ़ी का
आह्वान किया कि
तकनीक का सदुपयोग करें, गलत दिशा में उसका प्रयोग ना करें।
भगत सिंह पर चलाया गया मुकदमा और उससे संबंधित दस्तावेज आर्काइव्स पर मौजूद हैं
इसका अध्ययन अवश्य करें। आपने यदि उसे मुकदमे से संबंधित दस्तावेजों का भगत सिंह
के बयानों का अध्ययन गहराई से कर लिया तो आप भगत सिंह को अच्छी प्रकार से समझ
सकेंगे। उनके विचारों को जान सकेंगे।
कार्यक्रम
की अध्यक्षता प्रोफेसर नीलू जैन ने की। प्रोफेसर नीलू जैन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी
में हैरिटेज बिल्डिंग के रूप में परिवर्तित उसे स्थान को एक डॉक्यूमेंट्री के
द्वारा समझने की कोशिश की, जहां भगत सिंह ने अपने कैदी जीवन के महत्वपूर्ण समय बिताया था। अंत में
प्रोफेसर आराधना ने सभी अतिथियों आगंतुकों विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम
का संचालन डॉक्टर योगेश कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप कुमार
त्यागी, डॉ. मनीष त्यागी, डॉक्टर शालिनी प्रज्ञा, डॉ.
दीपक मधु त्यागी, धर्मेंद्र, डॉ. योगेंद्र गौतम, धनपाल, महिपाल, डॉक्टर स्नेहवीर पुंडीर, मयंक, विजयपाल, रोहतास, हापुड़ से
डा. दीपक रवि शंकर, शाह राजा, मनप्रीत, गाजियाबाद से श्वेता, ननौता से डॉक्टर रेनू, मोदीनगर से डॉक्टर मयंक, मुरादाबाद से मधु त्यागी विशेष रूप उपस्थित रहे।

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