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Wednesday, October 7, 2026

एमसीयू में टेड टॉक के दूसरे दिन जर्नलिज्म से लेकर टेलिमेडिसिन पर संवाद आयोजन

• टेलीकम्युनिकेशन से सुदूर गांवों में भी बेहतर इलाज संभव: डॉ. प्रिया भावे चित्तावर

नित्य संदेश, भोपाल। आज कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से चिकित्सा जगत कई चमत्कार कर रहा है। अब छोटे से गांवों और कस्बों में भी अच्छे चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हैं। दूर-दराज के इलाकों से लोगों को बीमारियों के इलाज के लिए हजारों किलोमीटर दूर जाने की जरूरत नहीं है। शहर में बैठे-बैठे रोबोटिक सर्जन गांवों तक अपनी विशेषज्ञता का लाभ दे रहे हैं। यह सब संभव हो पा रहा है टेलीकम्युनिकेशन की तकनीक से। एमसीयू (MCU) में आयोजित 'टेड टॉक' (TED Talk) में आज के सत्र की विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने ये बातें कहीं। डॉक्टर भावे ने 'सर्जरी विदाउट बॉर्डर' विषय पर दिए अपने उद्बोधन में कई दिलचस्प जानकारियां साझा कीं। उन्होंने विश्व की पहली टेलीसर्जरी से लेकर अब भारत में चिकित्सा जगत में हो रहे आधुनिकतम बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम कितने ही आगे बढ़ जाएं लेकिन एक डॉक्टर के अनुभव, विवेक और सर्जरी के समय निर्णय लेने की क्षमता का स्थान टेक्नोलॉजी नहीं ले सकती; फिर भी जो कुछ रोबोटिक काम भारत में हो रहा है वह अचरज के साथ गर्व का भी विषय है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर दूरस्थ सीमा पर हमारा कोई सैनिक घायल हो जाए, जहाँ तुरंत डॉक्टर नहीं पहुँच सकता है, तो ड्रोन कैमरा के माध्यम से सर्जरी संभव है।


डॉ. प्रिया ने श्रोताओं में शामिल छात्रों की जिज्ञासा भी शांत की। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब डॉक्टर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़कर मरीज को सरल शब्दों में ट्रीटमेंट और टर्मिनोलॉजी आदि की जानकारी दे रहे हैं, लेकिन मरीज की भी जिम्मेदारी है कि वह चिकित्सा शब्दावली को जानने का प्रयास करे क्योंकि एआई (AI) के माध्यम से अब सब कुछ जानना आसान हो गया है।

• भारतीय संस्कृति और ज्ञानपरंपरा बहुत समृद्ध: प्रो. दिवाकर शुक्ला

इस कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला ने 'इंडियन आर्ट ऑफ स्टोरी टेलिंग' विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी कहानी को कहने के लिए बहुत से ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। भारत में स्टोरी टेलिंग के हजारों तरीके हैं। हम भारतीय कहानियों को अपने जीवन में जीते हैं। ये कहानियां कभी खत्म नहीं होतीं। यहां के लोग, उनकी संस्कृति और कला में हजारों कहानियां मिलती हैं। भारतीय घरों में रोज बनाई जाने वाली रंगोली या अल्पना में भी कहानियां होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कहानियां बहुत प्रासंगिक होती हैं। भारत की कलाओं के जो पैटर्न हमें मिलते हैं, उनकी अपनी एक विशिष्ट ऐतिहासिक श्रृंखला होती है। वर्ली आर्ट (Warli Art) का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गौर से देखने पर मालूम होता है कि उसमें मानवीय जीवन की गतिविधियां और प्रकृति की नैसर्गिकता दिखती है। उसमें दिखने वाली परंपराएं और प्रतीक लोककलाकारों और महिलाओं द्वारा बनाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय कला का अपना एक विशिष्ट सौंदर्य है। हमें कहा जाता है कि हम अक्सर अपने गांव जाएं, वहां की संस्कृति को देखें, तो उससे हमें बहुत सी चीजें समझ आती हैं। इस सब को अनुभव करते हुए हम आसानी से कहानी कहना सीख सकते हैं। चीजों के घटते रहने को देखना हमें कई चीजें सिखाता है। आज के संदर्भ में ही देखें तो युवाओं को किसी औपचारिक लेक्चर के बजाय मेंटरिंग पसंद आती है। वे इसमें बेहतर महसूस करते हैं।

रामायण और महाभारत की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन कथाओं के भीतर अनेकों कहानियां होती हैं और हर एक कहानी बिल्कुल अलग होती है। यही कारण है कि रामायण और महाभारत के कई प्रकार भारत ही नहीं, दुनियाभर में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा बेहद विराट और समृद्ध है। यह हमारी चेतना में स्थापित है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार उपवास और उनसे संबंधित कथाओं के श्रोता भी उसके पात्र बन जाते हैं, यह भारत की कहानी कहने की कला का ही प्रभाव है। उन्होंने जनजातीय संस्कृतियों को विशिष्ट बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति बेहद शक्तिशाली है। अगर हम इसे समझें और जानें तो इससे जुड़ी कहानियों को भी जान सकते हैं। आज कमर्शियल मीडिया भारत की लोक कथाओं से प्रेरित होकर कहानियों को कह रहा है। स्टोरी टेलिंग की आर्ट के बारे में उन्होंने कहा कि ध्यान रखें कि अगर हमारी कहानी कृत्रिम होगी तो उन्हें सुनने और समझने वालों को आनंद नहीं आएगा। हर कहानी सच्ची होनी चाहिए और उसमें घटनाएं अपने प्राकृतिक स्वरूप में नजर आनी चाहिए।

• पत्रकार CTC के बजाय क्यूरोसिटी (Curiosity) से करें काम: मनीष दीक्षित

एक अन्य सत्र में वरिष्ठ पत्रकार मनीष दीक्षित ने 'सच की तलाश में एक रिपोर्टर की जिम्मेदारी' विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी पत्रकार तक कोई खबर खुद चलकर नहीं आती है। खबर के लिए बहुत प्रयत्न करने होते हैं। याद रखें कि अगर कोई खबर आप तक खुद चलकर आती है तो भी उसे जांचें और उसके तथ्यों को गहराई से वेरीफाई (Verify) करें। हम जिस विषय पर खबर करना चाहते हैं, उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को गहराई से समझना आवश्यक होता है। बिना तथ्यों और प्रक्रियाओं को समझे खबर करने से हमारी और हमारे संस्थान की साख दांव पर लग जाती है। पत्रकारिता में सूत्रों का खासा महत्व है। इसलिए एक पत्रकार को अपने सोर्स का ख्याल रखना चाहिए, उनका दिल जीतना चाहिए। सोर्स कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता, सोर्स लगातार डेवलप करते रहना चाहिए।

पत्रकारिता के टूल्स सीखें

उन्होंने कहा कि खबरों के तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है। कई बार उसे क्रॉस-चेक करना चाहिए। ऐसी खबरें जरूर करें जो आपको याद रहें या आपकी खबर एक यादगार स्टोरी बने। उन्होंने कहा कि पत्रकार को लगातार काम करना चाहिए और अलग-अलग टूल्स का इस्तेमाल सीखना चाहिए। कई बार उसे सवाल पूछने के तरीकों पर भी गौर करना चाहिए। एक पत्रकार को लोगों की बातों के बजाय अपने कामकाज पर ध्यान देना चाहिए।

CTC के बजाय क्यूरोसिटी पर करें काम

उन्होंने कहा कि पत्रकार का काम और उसकी खबरें ही उसे आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने बजट, प्रशासन और राजनीति की खबरों के उदाहरण देकर बताया कि जोश में रहते हुए भी परिणाम की चिंता करते हुए काम करना चाहिए। पत्रकारिता के विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि एक पत्रकार को CTC के बजाय क्यूरोसिटी (Curiosity) पर काम करना चाहिए।

अच्छी स्टोरीज पर तसल्ली से करें काम

उन्होंने कहा कि पत्रकार को अपनी स्किल्स, सोर्स और भरोसे पर काम करते रहना चाहिए। पत्रकारिता करते हुए निश्चित तौर पर चुनौतियां भी आती हैं। कई बार कानूनी चुनौतियां भी मिलती हैं। इसलिए खबरें करते समय संबंधित तथ्यों से जुड़े दस्तावेज अपने पास रखने चाहिए। पत्रकारिता करने का सार यह है कि आपके पास सूचना होनी चाहिए और उससे जुड़े हुए दस्तावेज होने चाहिए।

श्री दीक्षित ने कहा कि आज सोशल मीडिया खबरों का प्रमुख स्रोत है और इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। इसलिए अपने स्किल पर बहुत काम करने की जरूरत है। जल्दबाजी में एक्सक्लूसिव खबरों के पीछे भागने से अच्छा है कि अच्छी मेहनत कर एक बेहतरीन खबर की जाए।

इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म के साथ जुड़कर इस तरह का नवाचार अनुकरणीय है : कुलगुरु

इस अवसर पर विश्वविद्यालय में टेड टॉक (TED Talk) के आयोजन पर कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने विभाग को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म के साथ जुड़कर इस तरह का नवाचार अनुकरणीय है। कार्यक्रम में कुलसचिव पी. शशिकला ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में सत्रों का संचालन डॉ. जया सुरजानी ने किया। इस अवसर पर विभागों के प्रमुखों सहित प्राध्यापक भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का संयोजन एवं अतिथियों का आभार प्रदर्शन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने किया।


—डॉ. पवित्र श्रीवास्तव

विभागाध्यक्ष, जनसंपर्क विभाग




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