नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की पुरस्कार समिति ने विभाग की ओर से प्रतिवर्ष दिए जाने वाले सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। उर्दू विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ अपने स्थापना काल से ही जश्न-ए-सर सैयद का आयोजन करता आ रहा है। उल्लेखनीय है कि उर्दू विभाग, सर सैयद एजुकेशनल सोसाइटी, मेरठ के सहयोग से राष्ट्र के हितैषी और महान शिक्षाविद् सर सैयद अहमद खाँ की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष जश्न-ए-सर सैयद का भव्य आयोजन करता है।
इस अवसर पर सर सैयद व्याख्यानमाला, सर सैयद प्रश्नोत्तरी, भाषण एवं लेखन प्रतियोगिताएँ, संगोष्ठी, बैतबाजी और ग़ज़ल गायन आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही सर सैयद के मिशन को जन-जन तक पहुँचाने तथा शिक्षा के प्रसार में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रतिवर्ष सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष साहित्यिक सेवाओं के लिए प्रसिद्ध कवि एवं विचारक डॉ. जकी तारिक (गाजियाबाद) को सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उनकी प्रमुख कृतियों में एहसास की धूप (काव्य संग्रह, 1983), पलकों पे ख्वाब (काव्य संग्रह, 2003), सुबह की दहलीज़ (काव्य संग्रह, 2010–2023) और शाम का धुंधलका (काव्य संग्रह, 2023) शामिल हैं। काव्य संग्रहों के अतिरिक्त डॉ. जकी तारिक ने गद्य साहित्य में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी प्रमुख पुस्तकों में आज़ादी के बाद मंज़ूम ड्रामे (शोध, 2017), मतीन तारिक बाग़पती, मुन्तशिर अफ़कार (के.एल. नारंग साक़ी के लेख), तथा शेरी अफ़लाक के सितारे (आलोचनात्मक लेख) उल्लेखनीय हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी वे दैनिक इन दिनों, राष्ट्रीय सहारा, साप्ताहिक तेज़ाब और साप्ताहिक हिंडन पथ आदि से जुड़े रहे हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी सहित लगभग एक दर्जन शहरों की विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। वे रेडियो और टेलीविजन के विभिन्न मुशायरों एवं कार्यक्रमों में भी भाग ले चुके हैं। उन्होंने दूरदर्शन उर्दू के लिए उजाले यादों के नामक धारावाहिक भी लिखा था, जो काफी लोकप्रिय हुआ। वर्तमान में भी उनका साहित्यिक सफर निरंतर जारी है।
सामाजिक सेवा के लिए सर सैयद राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 एमएसएम की इकाई की अध्यक्ष स्मिता शर्मा को प्रदान किया जाएगा। स्मिता शर्मा ने अपनी शिक्षा वनस्थली विद्यापीठ, जयपुर से प्राप्त की। पढ़ाई के साथ-साथ उनकी खेलों में भी विशेष रुचि रही है और वे टेबल टेनिस की एक अच्छी खिलाड़ी रही हैं। उन्हें विमान उड़ाने का भी पर्याप्त अनुभव है। स्मिता शर्मा ने 'साथ' नामक एक संस्था की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से निराशा और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को नई आशा और जीवन की नई राह दिखाने का कार्य किया जाता है। आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने तथा लोगों को जीवन के मूल्य और महत्त्व के प्रति जागरूक करने के लिए यह संस्था निरंतर सेवाएँ प्रदान कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्मिता शर्मा ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उनकी संस्था द एकेडमी शिक्षा के साथ-साथ रंगमंच, गीता के सार और विभिन्न धर्मों की शिक्षाओं के माध्यम से बच्चों में प्रतिभा, संस्कार, सभ्यता और जीवन-मूल्यों का विकास करने का प्रयास कर रही है। ये पुरस्कार 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शाम 4:00 बजे आयोजित समापन सत्र में प्रदान किए जाएँगे।
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