नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शहर की प्राचीन समय में इतिहास व भौगोलिक सीमा को लेकर विभिन्न दरवाजों के इतिहास के संबंध में सर्वे करने का एक वृहद कार्य के अंतर्गत पहले दिन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के एम ए एसिएंट इंडियन हिस्ट्री और आर्कियोलॉजी के विद्यार्थियों ने मेरठ शहर स्थित खैर नगर दरवाजे का भौतिक सर्वे किया। विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा के नेतृत्व में व डॉक्टर कुलदीप कुमार त्यागी डॉ मनीष एवं प्रज्ञा के निर्देशन में विद्यार्थियों ने सर्वप्रथम आज प्रांत : खैर नगर स्थित गेट पर पहुंचकर गेट की ऐतिहासिकता एवं प्राचीनता के संबंध में स्थानीय लोगों से अलग-अलग ग्रुप में इंटरव्यू कर जानकारी प्राप्त की। साथ ही खैर नगर गेट के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री उसके डाइमेंशन को जांचा और परखा।
मेरठ की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और उनके संबंध में जन सामान्य तक जानकारी पहुंचे इसकी दिशा में इतिहास विभाग का यह अनूठा प्रयास है। वर्तमान और भावी पीढ़ी को मेरठ के स्थानीय इतिहास और स्मारकों के बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त हो सके इसके लिए भी इतिहास विभाग द्वारा यह कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने समूचे गेट की अंदर और बाहर तथा ऊपरी छत पर भी माप तौल लीं। विडंबना है कि वर्तमान में यह ऐतिहासिक गेट अपनी जीर्ण शीर्ण अवस्था में मेरठ शहर के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है शासन प्रशासन को इसके रखरखाव की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। गेट के ऊपर पांच पीढ़ियां से निवास करने वाले पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि हमारे पूर्वज यहां पीढ़ी दर पीढ़ी किराए पर रहते चले आ रहे हैं। गेट के अंदर की तरफ सुरक्षा की दृष्टि से प्राचीन समय में भी सुरक्षा चौकी के प्रमाण विद्यमान है। अपने खस्ताहाल अवस्था में खड़ा इस गेट का साल की लकड़ी का हाथी दरवाजा अपने गौरवशाली अतीत की ओर संकेत करता है। बताया जाता है कि 1980 तक के आसपास यह गेट शाम को बंद कर दिया जाता था। परंपरा के अनुसार इस गेट के दाहिनी पल्ले पर एक छोटा गेट के प्रमाण विद्यमान है। गेट के बाहरी हिस्से पर रंगीन चित्रकारी आज भी विद्यमान है जो इस गेट के सौंदर्य का प्रमाण है।
1904 के मेरठ के गजेटियर में वर्णित इस गेट और विभिन्न गेटों के बीच दीवार का निर्माण लखोरी ईंटों और चुनाऔर सुर्खी के मिश्रण से हुआ था जो आज भी प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। दीवार के बाहरी तरफ गजेटियर में वर्णित खाई का जिक्र है जो वर्तमान में एक छोटे नाले के रूप में अभी भी विद्यमान है। इस सर्वे के दौरान एक स्थानीय निवासी ने खैर नगर गेट से पश्चिम की ओर जाने वाली दीवार जो लाखोरी ईट से निर्मित की गई थी,के अवशेष भी दिखाएं तथा अनेक स्थानीय निवासियों हबीबुल्लाह इदरीश नवाब साहब मिनहाज हुसैन आदि ने बताया कि आज भी नींव खोदने पर लखोरी ईट की प्रमाण मिलते हैं। प्रशासन की तरफ से यद्यपि एक क्यू आर कोड लगाया गया है जिससे इस गेट के संबंध में थोड़ी बहुत जानकारी मिलती है किंतु इसकी जीर्ण शीर्ण अवस्था की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
इस अवसर पर पोरस शर्मा वंशिका करिश्मा पल्लवी शिवा वाणी जिया कुश गिरी आदित्य राज राठी सान्या गीता आदि विद्यार्थियों ने लगभग दो दर्जन से अधिक स्थानीय निवासियों के साथ इंटरव्यू किये। इसी क्रम में नवाब खैरबन्द शाह की हवेली पर यह शैक्षिक दल नवाब की 5वीं पीढ़ी के मिनहाज हुसैन अरशद आदि से मिला और उन पर उपलब्ध लिखित सामग्री फोटो आदि को देखा और परखा। विद्यार्थियों के अनुसार यह उनके जीवन का ऐसा पहला अनूठा अनुभव है जो वास्तव में रोमांचित करने वाला है।
प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि मेरठ की ऐतिहासिक विरासत को लेकर और शहर के इतिहास को लेकर इतिहास विभाग मेरठ के समस्त 8 गेटों का भौतिक सर्वे करने का प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है जिससे वर्तमान और भावी पीढ़ी मेरठ शहर के प्राचीन स्वरूप उसके किले किले की चार दिवारी और चारदीवारी को जोड़ने वाले समस्त गेटों की जानकारी जन सामान्य तक पहुंच सके। इसी क्रम में अगली बार एक और अन्य गेट का सर्वे होगा।
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