
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। हिंदी पखवाड़ा आयोजन 2026 के अंतर्गत पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में “हिंदी के विस्तार में साहित्यिक पत्रिकाओं का योगदान” विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ‘वीणा’ के संपादक डॉ. राकेश शर्मा तथा विशेष वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेस क्लब इंदौर के कोषाध्यक्ष श्री मुकेश तिवारी रहे।
मुख्य वक्ता डॉ. राकेश शर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा बनाने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने हिंदी के विकास, उसके संवैधानिक सफर और अपने साहित्यिक जीवन से जुड़े संस्मरण साझा किए।
अंग्रेजी की पढ़ाई से हिंदी के मंच तक का सफर
डॉ. शर्मा ने अपने शुरुआती जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि वे मूलतः अंग्रेजी के विद्यार्थी थे और अंग्रेजी में एम.ए. करना चाहते थे। कानपुर में दाखिले में विलंब होने के कारण अंग्रेजी की सीटें भर गईं। विभागाध्यक्ष की सलाह पर उन्होंने हिंदी विषय चुना। यही निर्णय आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने पिलानी, राजस्थान में वरिष्ठ व्याख्याता के रूप में कार्य किया तथा भारत सरकार में राजभाषा अधिकारी के रूप में सेवाएं दीं। बाद में वे प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘वीणा’ के संपादक बने और हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दिया।
बोली से भाषा बनने की यात्रा
डॉ. शर्मा ने अंग्रेजी के महान कवि जियोफ्री चौसर का उदाहरण देते हुए कहा— “उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चौसर ने अंग्रेजी को एक बोली से विकसित भाषा के रूप में स्थापित करने में योगदान दिया, उसी प्रकार युवाओं को हिंदी और देश की विभिन्न प्रादेशिक बोलियों को समृद्ध करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. संजय द्विवेदी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में प्रादेशिक बोलियों में भी समाचार-पत्र प्रकाशित हो सकते हैं। युवाओं को स्थानीय बोलियों और हिंदी को समृद्ध करने की दिशा में आगे आना चाहिए।
राजभाषा के संवैधानिक सफर पर चर्चा..
डॉ. शर्मा ने 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा हिंदी को राजभाषा स्वीकार किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदी के संवैधानिक सफर और राजभाषा के रूप में हिंदी की स्वीकृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

इंदौर की साहित्यिक-पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख
कार्यक्रम के विशेष वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेस क्लब इंदौर के कोषाध्यक्ष श्री मुकेश तिवारी ने मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति और इंदौर की समृद्ध साहित्यिक एवं पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1918 में महात्मा गांधी ने भी मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति इंदौर में आकर यहां के साहित्यिक और सांस्कृतिक गौरव की प्रशंसा की है।
उन्होंने शरद पगारे, नर्मदा प्रसाद उपाध्याय, सूर्यकांत नागर और डॉ. राकेश शर्मा जैसे साहित्यकारों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मनीषियों ने अपनी रचनाधर्मिता से इंदौर का नाम देशभर में रोशन किया है।
मुकेश तिवारी ने ‘नई दुनिया’ अखबार द्वारा मध्य भारत में स्थापित पत्रकारिता की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस परंपरा ने कई पीढ़ियों को निर्भीक और जनसरोकार वाली पत्रकारिता के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरगुन्दे ने की। इस अवसर पर विभाग के समस्त शिक्षकगण सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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