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Saturday, September 5, 2026

यहाँ का प्रत्येक विद्यार्थी न केवल अपना, बल्कि अपने माता-पिता और देश-समाज का नाम रोशन करे: प्रो. असलम जमशेदपुरी



उर्दू विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। किसी भी समाज में शिक्षक ही वह व्यक्तित्व होता है, जो अपने विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें सफलता की राह पर आगे बढ़ाता है। दुनिया का कोई भी समाज हो, हर जगह शिक्षक यही चाहता है कि उसके विद्यार्थी न केवल किताबी ज्ञान से संपन्न हों, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ें। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम की पुस्तकों का ज्ञान ही प्रदान नहीं करते, बल्कि अपने शिष्यों में वह दृढ़ संकल्प, साहस और आत्मविश्वास भी पैदा करते हैं, जिससे वे बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का भी हँसते हुए सामना कर सकें। यह शिक्षक ही होते हैं, जो अपने विद्यार्थियों की छोटी-से-छोटी गलतियों को सुधारते हैं और उन्हें समाज में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।


ये विचार प्रो. असलम जमशेदपुरी ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रेमचंद सेमिनार हॉल में आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि “मेरी इच्छा है कि यहाँ का प्रत्येक विद्यार्थी न केवल अपना, बल्कि अपने माता-पिता और देश-समाज का नाम रोशन करे।” इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुहम्मद नदीम ने पवित्र कुरआन की तिलावत से किया। मुहम्मद ईसा राना ने नात प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने की। कार्यक्रम में प्रसिद्ध शायर मौलाना सैयद नायाबुद्दीन नायाब और जीशान खान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विभाग की शोधार्थी सैयदा मरियम इलाही ने किया। इस अवसर पर महविश, नायाब, आयशा, ताहिरा परवीन, शाकिर मतलूब, इरफान आरिफ, नमरा, लिमरा और आलिमा नसीब ने शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें उपहार भेंट किए तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।


इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विभाग की शिक्षिका डॉ. शादाब अलीम ने कहा कि “शिक्षक दिवस वास्तव में शिक्षकों के लिए आत्ममूल्यांकन का दिवस भी है।” आज के दिन सभी शिक्षकों को आत्मचिंतन करना चाहिए कि क्या हम अपने दायित्वों का पूरी तरह निर्वहन कर रहे हैं या नहीं। समाज में शिक्षा के माध्यम से जिस प्रकाश और सामाजिक सुधार की अपेक्षा की गई थी, वह आज के दौर में कहीं न कहीं कमजोर होता दिखाई दे रहा है। समाज में अच्छाइयों की अपेक्षा बुराइयों का ग्राफ बढ़ रहा है और इसके पीछे कहीं न कहीं संस्कार एवं प्रशिक्षण की कमी भी जिम्मेदार है।


उन्होंने आगे कहा कि यह भी सत्य है कि दुनिया के प्रत्येक सफल व्यक्ति की सफलता के पीछे उसके शिक्षकों का योगदान होता है। माता-पिता जहाँ संतान का पालन-पोषण करने के साथ उसके संस्कारों का निर्माण करते हैं, वहीं एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन और व्यक्तित्व-निर्माण करने के साथ-साथ उनकी छिपी प्रतिभाओं को पहचानता है, उन्हें निखारता है और उनमें आत्मविश्वास एवं उत्साह का संचार करता है। इस प्रकार वह अज्ञानता के अंधकार को दूर कर उन्हें ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करता है। जिस प्रकार माता-पिता बच्चों के जीवन पर अमिट प्रभाव छोड़ते हैं, उसी प्रकार अच्छे और श्रेष्ठ शिक्षक भी अपने विद्यार्थियों के जीवन में सदैव सम्मान का उच्च स्थान रखते हैं। यह ऐसा संबंध है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।


डॉ. इरशाद सियानवी ने कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर अनेक संस्थाएँ शिक्षकों को सम्मानित करती हैं और उन्हें विभिन्न उपाधियों से नवाजती हैं। लेकिन इस दिन हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि शिक्षक की वास्तविक जिम्मेदारियाँ क्या हैं। विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना, उनके बेहतर भविष्य का निर्माण करना तथा उन्हें नई-नई संभावनाओं और मार्गों से परिचित कराना शिक्षकों की प्रमुख जिम्मेदारियाँ हैं। हम सभी शिक्षकों को अपने दायित्वों का भली-भाँति एहसास होना चाहिए। तभी हम एक सफल और आदर्श शिक्षक बन सकते हैं।


डॉ. आसिफ अली ने कहा कि “एक सुदृढ़ और स्वस्थ समाज के निर्माण में शिक्षकों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।” शिक्षक न केवल बच्चों को शिक्षा से आलोकित करते हैं, बल्कि उनमें संस्कार एवं चरित्र का निर्माण कर उन्हें इस योग्य बनाते हैं कि वे आगे चलकर स्वस्थ समाज के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। लेकिन आज यह देखकर अफसोस होता है कि अनेक शिक्षक अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। हमें इन सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना होगा।


डॉ. अलका वशिष्ठ ने कहा कि प्रत्येक समाज में शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। शिक्षक एक साथ माता-पिता और गुरु की भूमिका निभाते हुए अपने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है। सभी शिक्षकों को समाज की भलाई और कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। जीशान खान ने कहा कि आज यहाँ विद्यार्थियों की प्रस्तुतियाँ देखकर बहुत प्रसन्नता हुई। यहाँ के विद्यार्थियों का यह सौभाग्य है कि उन्हें इतने अच्छे और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक प्राप्त हुए हैं। इस विभाग के विद्यार्थी यहाँ से शिक्षा प्राप्त करने के बाद व्यावहारिक जीवन में भी न केवल अपना, बल्कि अपने माता-पिता और अपने संस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं।


कार्यक्रम में प्रसिद्ध शायर मौलाना सैयद नायाबुद्दीन नायाब ने शिक्षकों के सम्मान में एक अत्यंत सुंदर कविता प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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