नदी की नसों को जीवित रखने और वर्षाजल को सहेजने का लिया संकल्प
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। कान्ह-सरस्वती नदी को केवल एक नदी के रूप में नहीं, बल्कि इंदौर की स्मृतियों, संस्कृति और जीवनधारा के रूप में देखते हुए इसके पुनर्जीवन के प्रयासों को व्यापक जन अभियान बनाने का आह्वान किया गया। विश्व नदी दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार शाम कृष्णपुरा छत्री घाट पर अभ्यास मंडल इंदौर द्वारा आयोजित “कान्ह-सरस्वती आत्मनाद—आओ, रूठी कान्ह-सरस्वती को मनाएं” कार्यक्रम में शहर के पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, साहित्यकारों और पर्यावरण प्रेमियों ने नदी के प्रति अपने भाव व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत कवि प्रदीप नवीन ने नदी पर लिखी अपनी कविता के भावपूर्ण पाठ से की। इसके बाद उपस्थित नागरिकों ने कान्ह-सरस्वती नदी के पुनर्जीवन को केवल किसी संस्था या कुछ व्यक्तियों का अभियान न मानकर इसे जन-जन का अभियान बनाने तथा नदी के लिए जन-प्रतिज्ञा लेने का आह्वान किया।
रामेश्वर गुप्ता अध्यक्ष अभ्यास मंडल ने कहा कि कान्ह-सरस्वती के लिए लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों और लगातार आयोजित हो रहे कार्यक्रमों के कारण ही आज नदी के अस्तित्व को लेकर समाज में चेतना जीवित है। कान्ह-सरस्वती अभियान को नर्मदा आंदोलन जैसे व्यापक जनजागरण से जोड़ने की आवश्यकता बताई। वरिष्ठ पर्यावरणविद् डॉ. ओ.पी. जोशी, डॉ. एस.एल. गर्ग और डॉ. दिलीप वाघेला ने नदी पुनर्जीवन के पर्यावरणीय पक्ष को सामने रखा। उन्होंने नदी को केवल बहते हुए जल के रूप में देखने के बजाय उसके प्राकृतिक जलमार्ग, जलग्रहण क्षेत्र, तालाबों, नालों और वर्षाजल की पूरी प्रणाली को समझने की आवश्यकता बताई। पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सी.बी. सिंह और मुकेश चौहान ने नदी से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कान्ह-सरस्वती इंदौर की पुरानी पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने नदी से जुड़े अतीत के अनुभवों और वर्तमान चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में वैशाली खरे, मनीष भालेराव, गिरीश चव्हाण, मुरली खंडेलवाल, इशाक चौधरी,दिवाकर घायल, सुनील बेनवंशी ,डॉ. भूपेंद्र धारवा, डॉ. विकास चौधरी, हरेराम वाजपेयी, सुनील व्यास ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने नदी पुनर्जीवन में समाज की भागीदारी, जल संरक्षण और प्राकृतिक जलमार्गों के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम की रूपरेखा एवं संचालन डॉ. स्वप्निल व्यास ने किया। उन्होंने कहा कि कान्ह-सरस्वती को पुनर्जीवित करने के लिए दो प्रमुख संकल्पों को जनचेतना का हिस्सा बनाना होगा नदी की नसों को जिंदा रखना और नदी के लिए पानी बचाना होगा। इस अवसर पर शफी शेख, एन.के. उपाध्याय, किशन सोमानी, द्वारका मालवीय, शरद सोमपुरकर सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कृष्णपुरा छत्री घाट पर आयोजित यह “आत्मनाद” नदी के प्रति भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ उसे जनभागीदारी के माध्यम से पुनर्जीवित करने की दिशा में सामूहिक संकल्प का अवसर बना।


No comments:
Post a Comment