नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्त्री आर्य समाज, दयानन्द पथ, सदर के तत्वावधान में श्रावणी उपाकर्म के पावन अवसर पर एक प्रभावशाली वैदिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मनोज जैन (साइकिल वाले) के निज निवास बंगला नं. 291, आर. ए. लाइन्स, तोपखाना में हुआ। कार्यक्रम से पूर्व पूरे परिवार के साथ आचार्य जगदीश के ब्रह्मत्व में विधिवत यज्ञ सम्पन्न किया गया। यज्ञ के उपरान्त सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक पण्डित अजय आर्य ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि ईश्वर की दया तो प्रत्येक प्राणी पर है, परन्तु कृपा उसी पर होती है जो परोपकार और समाज सेवा के मार्ग पर चलता है। जितना-जितना मनुष्य परोपकार करता है, उतनी-उतनी ईश्वर की कृपा उस पर बरसती है। उन्होंने अपने प्रसिद्ध भजनों - "धीरे-धीरे मोड़ तू इस मन को" और "जिस घर मात-पिता का सम्मान होता है, उस घर ही सुखों का सब सामान होता है" के माध्यम से उपस्थित माता-बहनों, युवाओं एवं विभिन्न समाजों से आए आर्यजनों को भाव-विभोर कर दिया।
तत्पश्चात आर्य जगत के उद्भट विद्वान आचार्य रणवीर शास्त्री ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती की सत्य, तर्क और प्रमाण आधारित परम्परा हमें प्रत्येक मान्यता को विवेक की कसौटी पर कसने की प्रेरणा देती है। उन्होंने वैदिक संस्कृति, सत्य और राष्ट्र-जागरूकता का भाव जागृत किया।
आचार्य रणवीर शास्त्री ने दान और दक्षिणा के सूक्ष्म भेद को स्पष्ट करते हुए बताया कि दान में देने वाला बड़ा और लेने वाला छोटा होता है, जबकि दक्षिणा में देने वाला छोटा और लेने वाला बड़ा होता है। उन्होंने एक कथानक के माध्यम से यज्ञ के महत्व को समझाया तथा यज्ञ और दक्षिणा के 12 पुत्रों - तोष (संतुष्टि), शम (कल्याण) आदि पर अद्भुत चर्चा प्रस्तुत की।
इस अवसर पर मधु गुप्ता, अपर्णा अग्रवाल, मणि गर्ग, विभा गुप्ता, अजीता राजवंशी, उषा एरन, विजय प्रेमी, राजेश सेठी, मांगेराम आर्य, रविन्द्र आर्य, अशोक सुधाकर सहित बड़ी संख्या में आर्यजन उपस्थित रहे।
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