Wednesday, September 2, 2026

90 के दशक में वर्चस्व की जंग में 6-6 हत्याओं से दहला था गंगा खादर

 -एक तबका श्रीराम को आज भी "अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक" मानता है


लियाकत मंसूरी

नित्य संदेश, मेरठ। आगरा सेंट्रल जेल से 30 साल बाद रिहा हुए श्रीराम जाटव उर्फ सिरया के बाहर आते ही एक बार फिर 90 के दशक में हस्तिनापुर के गंगा खादर में दहशत का पर्याय बना श्रीराम गैंग चर्चा में आ गया है।


90 के दशक में हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में दो गैंगों श्रीराम और किरोड़ी गुर्जर गैंग के बीच वर्चस्व को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था। इसी गैंगवार ने बाद में भीकुंड-इकवारा नरसंहार का रूप ले लिया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, किरोड़ी गुर्जर गैंग ने वर्ष 1997 में इकवारा के जंगल में जाति विशेष के छह लोगों की गला रेतकर हत्या कर दी थी। इसके प्रतिशोध में श्रीराम उर्फ सिरया ने जनवरी 1997 में भीकुंड गांव में एक चौपाल पर गोलियां बरसाकर छह लोगों मौली, संजय, नरेंद्र, बाबू, करतार सिंह और सुभाष की हत्या कर दी थी। रोहताश व बालेश्वर गंभीर घायल हुए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी दर्ज है कि 16-17 जनवरी 1997 की रात हथियारबंद लोग भीकुंड गांव पहुंचे और घर में सो रहे लोगों पर फायरिंग की।


अदालत से उम्रकैद

वर्ष 1997 में हुई गैंगवार में श्रीराम ने कुछ लोगों के साथ मिलकर भीकुंड में अंधाधुंध फायरिंग कर छह लोगों को मौत के घाट उतार दिया था, उक्त मामले में श्रीराम जेल में बंद था। मामले में निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। मुख्य आरोपी श्रीराम जाटव ने 30 साल बाद सजा पूरी की और आगरा जेल से रिहा हुआ। रिहाई के बाद समर्थकों ने आगरा में फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया और भारत सरकार लिखी खुली गाड़ी में रोड शो भी निकाला गया।


श्रीराम जाटव कैसे बना खादर का कुख्यात नाम?

30 साल बाद आगरा सेंट्रल जेल से रिहा हुआ श्रीराम जाटव कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि हस्तिनापुर के गंगा खादर की उस जातीय वर्चस्व की जंग की पैदाइश है, जिसने 90 के दशक में मेरठ को दहला दिया था। श्रीराम जाटव मूल रूप से हस्तिनापुर के भीकुंड-इकवारा क्षेत्र का रहने वाला है, उसका परिवार अब मेरठ शहर में रहता है। 90 के दशक में गंगा खादर में जमीन, रेत खनन और जातीय वर्चस्व को लेकर दो गुट सक्रिय थे, एक किरोड़ी गुर्जर गैंग और दूसरा श्रीराम गैंग।


आम थी दलित समाज पर अत्याचार की घटनाएं

उस दौर में खादर में दलित समाज पर अत्याचार की घटनाएं आम थीं। समर्थकों की मानें तो श्रीराम ने इसी अन्याय के खिलाफ हथियार उठाया और धीरे-धीरे उसका अपना गैंग बन गया, जिसे लोग बहुजन समाज के स्वाभिमान की लड़ाई से जोड़कर देखते हैं। वहीं पुलिस रिकॉर्ड में वह हिस्ट्रीशीटर और गैंग लीडर के रूप में दर्ज हुआ।


कैसे बना बदमाश, इकवारा का बदला भीकुंड

पुलिस और अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, कहानी 1997 से शुरू होती है, पहले इकवारा कांड हुआ, जिसमें किरोड़ी गुर्जर गैंग पर जाति विशेष के छह लोगों की गला रेतकर हत्या करने का आरोप लगा। इसके प्रतिशोध में श्रीराम गैंग ने भीकुंड कांड को अंजाम दिया। एक तबका उसे आज भी "अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक" मानता है, जिसने अपनी जवानी समाज के स्वाभिमान के लिए जेल में गुजार दी। उसका परिवार इस दौरान बिखर गया और जमीन-जायदाद बिक गई। उसकी रिहाई के लिए विजय कुमार जाटव और उनकी टीम ने लखनऊ से आगरा और प्रयागराज तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

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