नित्य संदेश। उत्तर प्रदेश के निर्यात को वर्ष 2030 तक ₹5 लाख करोड़ तक पहुंचाने के लक्ष्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रभारी राजुद्दीन गादरे ने कहा कि विकास केवल बड़े-बड़े आंकड़ों और घोषणाओं में नहीं, बल्कि किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, युवा और वंचित समाज के जीवन में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान लंबे समय से कृषि, किसानों, कारीगरों और छोटे कारोबार से रही है। ऐसे में खेती की जमीन, पर्यावरण, रोजगार, शिक्षा और छोटे कारोबार की स्थिति को भी विकास के पैमाने में शामिल किया जाना चाहिए।
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि धर्म और आस्था के नाम पर समाज को बांटने के बजाय युवाओं को शिक्षा, रोजगार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक विवादों और अंधविश्वास को बढ़ावा देने से युवाओं का ध्यान शिक्षा, रोजगार और वैज्ञानिक सोच जैसे वास्तविक मुद्दों से भटकता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से दलित, शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों को समानता और अधिकारों का मार्ग दिया। आज आवश्यकता इस बात की है कि संविधान में प्राप्त अधिकारों को धरातल पर सशक्त किया जाए और समाज के सभी वर्गों को शिक्षा, रोजगार तथा सम्मान के समान अवसर मिलें।
गादरे ने कहा, “उत्तर प्रदेश को ऐसी तरक्की चाहिए, जिसमें किसान की जमीन और हित सुरक्षित हों, युवाओं को रोजगार मिले, छोटे कारोबार मजबूत हों, शिक्षा और वैज्ञानिक सोच आगे बढ़े तथा समाज में भाईचारा कायम रहे। विकास का वास्तविक अर्थ आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव है।”
— राजुद्दीन गादरे
राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश प्रभारी, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश
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