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Thursday, September 10, 2026

50 साल से अटकी योजना 77 पर घेराव- कलेक्टर के सामने फूटा पीड़ितों का गुस्सा


• पीड़ित बोले- सालों से भटक रहे, आखिर हमें न्याय कब मिलेगा


नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। योजना क्रमांक 77 को करीब 50 साल से खत्म नहीं किए जाने से नाराज प्रभावित भूखंडधारक और रहवासी गुरुवार को इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) पहुंचे। अयोध्यापुरी रहवासी संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने IDA अधिकारियों का घेराव कर विरोध जताया। लोगों का कहना था कि वे सालों से योजना से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला।


लोगों के आक्रोश की जानकारी मिलने पर कलेक्टर भी मौके पर पहुंचे। प्रभावित लोगों ने कलेक्टर को घेरकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "हम सालों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हो रही। हमारा जीवन नर्क हो गया है। आखिर हमें न्याय कब मिलेगा?" रहवासियों ने योजना क्रमांक 77 को तत्काल खत्म अथवा डि-नोटिफाई करने की मांग रखी।


1976 में बनी थी योजना, 1996 में हाईकोर्ट ने भू-अर्जन निरस्त किया

रहवासियों के मुताबिक, ग्राम छोटी खजरानी और खजराना क्षेत्र में इंदौर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने वर्ष 1976 में आवासीय विकास योजना क्रमांक 77 प्रस्तावित की थी। योजना में शामिल भू-स्वामियों की आपत्तियों पर व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर नहीं दिए जाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हुई थी।


मामले में हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 26 सितंबर 1996 को योजना के तहत धारा 50 (7) की अधिसूचना और भू-अर्जन की पूरी कार्रवाई निरस्त कर दी थी। रहवासियों का कहना है कि इस फैसले के खिलाफ प्राधिकरण ने किसी न्यायालय में अपील भी नहीं की।


इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में IDA ने 16 जुलाई 2001 को संकल्प क्रमांक 324 पारित किया। संघ के अनुसार, गीता नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था की भूमि को छोड़कर बाकी भूमि को योजना क्रमांक 77 से मुक्त किया जा चुका है।

50 से ज्यादा भू-स्वामियों को NOC भी जारी

रहवासियों ने दावा किया कि योजना में आज तक कोई अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो सका है। वहीं, पिछले करीब 23 वर्षों में योजना के तहत 50 से अधिक भू-स्वामियों को NOC जारी किए जा चुके हैं। इन NOC के आधार पर कई निजी परियोजनाओं का विकास भी पूरा हो चुका है।


प्रभावित लोगों का सवाल है कि जब जमीन के कई हिस्सों को योजना से मुक्त किया जा चुका है और NOC भी जारी किए जा चुके हैं, तो पूरी योजना को औपचारिक रूप से समाप्त करने में देरी क्यों की जा रही है।


2019 के संशोधित कानून का भी दिया हवाला

अयोध्यापुरी रहवासी संघ ने योजना को खत्म करने के लिए मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) अधिनियम, 2019 का हवाला दिया है। संघ का कहना है कि संशोधित प्रावधानों में ऐसी पुरानी योजनाओं को व्यपगत करने का प्रावधान है, जिनमें विकास कार्य शुरू नहीं हुआ या योजना के क्रियान्वयन के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए।


संघ के अनुसार, योजना क्रमांक 77 में उस समय करीब 67.16 लाख रुपए खर्च हुए थे, जो कुल योजना लागत के 10 प्रतिशत से कम बताए गए हैं। इसलिए नियमानुसार आवश्यक प्रतिपूर्ति लेकर योजना को व्यपगत किया।

18 कॉलोनियों के करीब 7 हजार परिवार प्रभावित

रहवासियों का कहना है कि योजना क्रमांक 77 की लंबित स्थिति का असर सिर्फ अयोध्यापुरी तक सीमित नहीं है। अयोध्यापुरी सहित करीब 18 कॉलोनियों के लगभग 7 हजार परिवार इससे प्रभावित बताए जा रहे हैं। योजना के कारण इन क्षेत्रों में नियमितीकरण और नागरिक अधोसंरचना से जुड़े कई काम प्रभावित हो रहे हैं।


प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा कि पांच दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वे योजना के नाम पर अनिश्चितता में जी रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारी अब सिर्फ आश्वासन देने के बजाय स्पष्ट रूप से बताएं कि योजना कब समाप्त होगी और प्रभावित परिवारों को कब राहत मिलेगी।


कांग्रेस नगर अध्यक्ष भी पहुंचे, बोले- अन्याय हो रहा

पीड़ितों के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नगर अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों से कहा कि भाजपा के शासन में उनके साथ लगातार अन्याय हो रहा है।


प्रदर्शन के दौरान रहवासियों ने '50 साल बहुत हुए- अब और नहीं' और 'योजना क्रमांक 77 को समाप्त करो' जैसे नारे लगाकर अपना आक्रोश जताया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी मामले में हस्तक्षेप कर जल्द समाधान कराने की मांग की।


लोगों ने रखीं ये प्रमुख मांगें--


• योजना क्रमांक 77 को तत्काल व्यपगत/डि-नोटिफाई किया जाए।


• 2019 के संशोधित अधिनियम के तहत प्रक्रिया पूरी की जाए।


• नियमानुसार आवश्यक प्रतिपूर्ति लेकर योजना समाप्त की जाए।


• 1996 के हाईकोर्ट के फैसले और पहले जारी NOC के अनुरूप लंबित कार्रवाई पूरी हो।


• अयोध्यापुरी सहित प्रभावित कॉलोनियों के करीब 7 हजार परिवारों को नियमितीकरण में राहत दी जाए।


• वर्षों से लंबित मामले में अब अंतिम और स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

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