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Thursday, September 3, 2026

मुराई समाज धर्मशाला विवाद: हाईकोर्ट ने निरस्त की अध्यक्ष की याचिका, धारा 32 के तहत जांच का रास्ता साफ

 

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। मुराई (मौर्य) समाज इंदौर एवं श्री मुराई समाज धर्मशाला से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अध्यक्ष जयदीप द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। जयदीप ने Assistant Registrar द्वारा 7 मई 2025 को मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेकरण अधिनियम, 1973 की धारा 32 के तहत शुरू की गई जांच की कार्रवाई को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की थी। हालोंकि हाईकोर्ट ने Assistant Registrar की कार्रवाई को कानून के अनुरूप मानते हुए याचिका खारिज कर दी है ।


श्री मुराई मौर्य समाज इंदौर की  नौलखा चौराहे के नजदीक स्थित श्री  मुराई मौर्य समाज धर्मशाला के प्रबंधकीय विवाद और जांच प्रक्रिया के को लेकर डेढ़ साल से चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है। ने जस्टिस संदीप एन. भट्ट की कोर्ट ने समाज के अध्यक्ष जयदीप वर्मा द्वारा धर्मशाला समिति की स्वतः संज्ञान  लेकर शुरू की गई जांच के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज किया है।


पूरा विवाद इंदौर स्थित मुराई मौर्य समाज धर्मशाला के चुनाव और संचालन से जुड़ा है। समाज की ओर से अध्यक्ष जयदीप वर्मा ने याचिका दायर कर असिस्टेंट रजिस्ट्रार, फर्म्स एंड सोसाइटीज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें संस्था की कार्यप्रणाली की जांच के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ता समाज का तर्क था कि रजिस्ट्रार ने बिना किसी पूर्व शिकायत या बिना सुनवाई अवसर दिए सीधे जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।


जांच शुरू करने के लिए पहले से सबूत जरूरी नहीं : हाईकोर्ट

सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने आदेश में साफ कहा है कि फर्म्स एंड सोसायटी अधिनियम में रजिस्ट्रार को स्वतः संज्ञान लेने की शक्तियां प्राप्त हैं। इसके साथ ही व्यवस्था देते हुए टिप्पणी की कि सोसायटी के काम, वित्तीय स्थिति या संस्था के ढांचे की जांच शुरू करने से पहले रजिस्ट्रार के पास किसी भी प्रकार की सामग्री या सबूत का होना कानूनन अनिवार्य नहीं है।


धर्मेंद्र वर्मा एवं अन्य के पक्ष को मिली मजबूती

इस फैसले को धर्मेंद्र वर्मा एवं अन्य निजी प्रतिवादियों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि जिस जांच की प्रक्रिया को रोकने के लिए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, उस चुनौती को न्यायालय ने खारिज कर दिया है। अब मामला न्यायालय में जांच रोकने की लड़ाई से आगे बढ़कर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष दस्तावेजों और तथ्यों के परीक्षण की दिशा में आगे बढेगा।


हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

जयदीप की ओर से यह तर्क दिया गया था कि Assistant Registrar ने धारा 32 के तहत जांच शुरू करने से पहले आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया और 7 मई 2025 का आदेश निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि समाज के चुनाव विधिवत हुए हैं।

लेकिन हाईकोर्ट ने इन तकों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि Assistant Registrar के पास Suo Motu Inquiry शुरू करने की आवश्यक शक्ति है और जांच शुरू करने का आदेश कानून के अनुरुप है।


अब दस्तावेजों के आधार पर होगा फैसला

इस पूरे घटनाक्रम के बाद समाज के भीतर अब निगाहें धारा 32 के तहत होने वाली जांच पर टिक गई हैं। जांच के दौरान समाज के गठन, संचालन, चुनाव, वित्तीया स्थिति तथा अन्य संबंधित पहलुओं से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड जांच के दायरे में आ सकते हैं। धारा 32 के तहत सक्षम प्राधिकारी को समाज की पुस्तकों, खातों, दस्तावेजों, संपक्तियों आदि के संबंध में जांच करने तथा आवश्यक व्यक्तियों से जानकारी लेने की शक्तियां प्राप्त हैं।


आगे क्या?

अब जांच प्रक्रिया के दौरान समाज से जुड़े सभी संबंधित रिकॉर्ड, दस्तावेज और तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा जो भी विधिक निर्णय लिया जाएगा, वही समाज विवाद के भविष्य को निर्धारित करेगा।


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