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Friday, August 28, 2026

मेरठ बंद पर व्यापारियों में फूट, सियासत तेज

 


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में 2 सितंबर को प्रस्तावित मेरठ बंद को लेकर अब व्यापारिक एकता में दरार आ गई है और मामला सियासी रंग लेता जा रहा है।


संयुक्त व्यापार संघ ने ऐन वक्त पर मेरठ बंद से अपना समर्थन वापस ले लिया है। संघ के दोनों गुटों के अध्यक्षों नवीन गुप्ता और अजय गुप्ता ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि लखनऊ से आए अपर आवास आयुक्त और जिला प्रशासन ने हर स्तर पर मदद का आश्वासन दिया है, ऐसे में बंद जरूरी नहीं है। संघ के महामंत्री दलजीत सिंह ने तो दीपावली तक न्याय मिलने की बात कहकर व्यापारियों से दीपावली दोगुने उत्साह से मनाने की अपील कर दी।


समर्थन वापसी से आंदोलनकारी व्यापारियों में नाराजगी

संयुक्त व्यापार संघ के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। मेरठ व्यापार बचाओ संयुक्त आंदोलन समिति ने संघ के फैसले को व्यापारियों के साथ धोखा बताया है। समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने साफ कहा है कि जब तक सरकार ठोस नीति का लिखित मसौदा नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा। व्यापारियों ने दो सितंबर को हर कीमत पर मेरठ बंद करने की बात दोहराई है।


वकीलों और किसानों की एंट्री, बढ़ा सियासी पारा

इस पूरे मामले में अब वकीलों और किसान संगठनों की एंट्री ने सियासत को और गरमा दिया है। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र सिंह और मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा ने आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है। वहीं भारतीय किसान यूनियन धन सिंह कोतवाल के प्रदेश अध्यक्ष नितेश पंवार ने कहा कि यदि व्यापारियों की रोजी-रोटी पर संकट आया तो किसान उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे। वकीलों और किसानों के समर्थन के बाद आंदोलनकारी व्यापारियों ने 2 सितंबर को मेरठ बंद के साथ-साथ आवास विकास परिषद कार्यालय शास्त्रीनगर के घेराव का भी ऐलान कर दिया है।


बताया जा रहा है कि सर्किट हाउस में हुई बैठक में अधिकारियों ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर बंद टालने का दबाव बनाया था, जिस पर व्यापारी भड़क गए थे। व्यापारियों का कहना है कि तीन दिन से उन पर बंद टालने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि सरकार राहत का कोई ठोस पैगाम नहीं दे रही। अब देखना होगा कि 2 सितंबर को मेरठ की सड़कों पर व्यापारिक एकता दिखती है या फिर यह बंद व्यापारियों की आपसी फूट की भेंट चढ़ जाता है।

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