
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। मालवा की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर की पावन धरा हमेशा से अपनी अनूठी परंपराओं, अटूट लोक-आस्था और राष्ट्रीय चेतना के उत्सवों के लिए पूरे देश में जानी जाती है। इसी गौरवशाली परंपरा का निर्वाह करते हुए इस वर्ष रक्षाबंधन के पावन पर्व पर विश्व प्रसिद्ध प्रथम पूज्य श्री खजराना गणेश को 40 इंच बाय 40 इंच की भव्य सनातन राखी' अर्पित की जाएगी।
यह केवल एक राखी नहीं, बल्कि देश के समसामयिक विषयों, राष्ट्रीय गौरव और धार्मिक पुनर्जागरण का एक जीवंत प्रतीक है।
प्रमुख विशेषताएं एवं राष्ट्रीय-धार्मिक संदेश
वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ का उत्सवः इस वर्ष राखी की मूल थीम राष्ट्रभाव' और 'वंदे मातरम के 150 वर्ष पर आधारित है, जो इंदौर की कला के माध्यम से पूरे देश में राष्ट्रीय चेतना का संचार करती है।
भोजशाला में मां वाग्देवी की पुनर्स्थापना का संकल्पः राखी में मां वाग्देवी के स्वरूप को उकेरकर लंदन संग्रहालय में रखी उनकी ऐतिहासिक प्रतिमा को धार की ऐतिहासिक भोजशाला में पुनः स्थापित करने के राष्ट्रीय संकल्प को स्वर दिया गया है।
कमल पुष्प पर सजा सनातन वैभवः कमल के भव्य आकार में तैयार इस राखी में सनातन संस्कृति के प्रमुख स्तंभों को समाहित किया गया है:
बाबा महाकालः आगामी सिंहस्थ और महाकाल लोक की भव्यता का प्रतीक।
भगवान जगन्नाथः जागृत आस्था और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक।
मां महाकाली व महालक्ष्मीः राष्ट्र की सुख, समृद्धि, संपन्नता और सनातन शक्ति की प्रार्थना।
सांस्कृतिक विविधता और 24 वर्षों की अटूट सेवा।

देश की विविधता से सजी कला
राखी को भव्य रूप देने के लिए भारत के चार प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों-कोलकाता, जयपुर, मुंबई और सूरत-से विशेष सलमा-सितारे, नग, मोती और जरदोजी सामग्री मंगाई गई है।
24वें वर्ष की परंपराः मातुश्री पालरेचा परिवार (शांतु पुंडरीक पालरेचा, धीरज, जयेश, मितेश व परिवार के सदस्य) पिछले ढाई महीने से इस पवित्र कार्य में लीन हैं। पिछले 23 वर्षों से यह परिवार समुद्र मंथन, 12 ज्योतिर्लिंग, बेटी बचाओ, गंगाजल और नतग्रह जैसे राष्ट्रीय व सामाजिक विषयों पर राखियां बनाकर खजराना गणेश को अर्पित करता आ रहा है।
इंदौर का यह पावन आयोजन पूरे भारतवर्ष को संदेश देता है कि हमारी लोक-परंपराएं और त्योहार कैवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय स्वाभिमान, समसामयिक मुद्दाँ और सांस्कृतिक चेतना को एकजुट करने के सबसे सशक्त माध्यम हैं।
विश्व की सबसे बड़ी राखी भगवान खजराना गणेश को 40×40 इंच की भव्य 'सनातन राखी' - वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष थीम - भगवान जगन्नाथ, बाबा महाकाल सिंहस्थ और महाकाल लोक की आस्था - मां वाग्देवी, भोजशाला (धार) पुनर्स्थापना के संकल्प का संदेश - महाकाली, कोलकाता सनातन शक्ति और प्रभाव का प्रतीक है।
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