शाहिद खान
नित्य संदेश, नोएडा। सेक्टर-31 स्थित पावर ट्रांसफार्मर के फुंकने और पूरे मामले को विभागीय स्तर पर दबाने के आरोप सामने आने के बाद नोएडा विद्युत विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, मामले की लीपापोती करते हुए कार्रवाई का पूरा फोकस हाल ही में तैनात एसडीओ और जूनियर इंजीनियरों पर कर दिया गया, जबकि वास्तविक जिम्मेदार माने जा रहे वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि नए अधिकारियों को "बलि का बकरा" बनाकर बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया।
सूत्रों का दावा है कि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के कुछ अधिकारियों ने उच्च स्तर पर तथ्यों को छिपाकर पूरे मामले को अलग दिशा देने का प्रयास किया। विभागीय दस्तावेजों के हवाले से यह भी चर्चा है कि विवादित पावर ट्रांसफार्मर लगभग तीन महीने तक बिजलीघर से गायब रहा और उसे कथित रूप से बिना सक्षम स्वीकृति के एक निजी कंपनी में मरम्मत के लिए भेज दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि इतना बड़ा पावर ट्रांसफार्मर बिजलीघर से बाहर चला जाए और इसकी जानकारी अधीक्षण अभियंता (SE), मुख्य अभियंता (Chief Engineer) तथा निदेशक स्तर तक न पहुंचे, यह कैसे संभव है?
विभागीय सूत्रों का आरोप है कि शीर्ष अधिकारियों के कथित संरक्षण के चलते कुछ चहेते अधिकारियों को बचाया जा रहा है, जबकि ईमानदारी से कार्य करने वाले कर्मचारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि वर्तमान प्रबंधन व्यवस्था का लाभ उठाकर नीचे तक पूरा तंत्र मनमानी करने लगा है।
दो वर्षों में आधा दर्जन से अधिक बड़े पावर ट्रांसफार्मर फुंकने के आरोप
मामला केवल एक ट्रांसफार्मर तक सीमित नहीं बताया जा रहा। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान नोएडा क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक बड़े पावर ट्रांसफार्मर फुंके, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में केवल सीमित मामलों का उल्लेख किया गया। आरोप है कि कई ट्रांसफार्मरों को निजी कंपनियों से सांठगांठ कर विभागीय प्रक्रिया से बाहर मरम्मत कराया गया, जिससे राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा और पूरे प्रकरण को विभागीय अभिलेखों से दूर रखा गया।
*अवैध लाइन शिफ्टिंग और सस्पेंड जेई को संरक्षण के आरोप*
इसी क्रम में विभाग के एक जूनियर इंजीनियर सचिन का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि उन पर अवैध लाइन शिफ्टिंग और दबंगई से जुड़े गंभीर आरोप लगे, लेकिन विभागीय कार्रवाई को इस प्रकार संचालित किया गया कि भविष्य में उन्हें कानूनी राहत मिल सके। सूत्रों का दावा है कि मुख्य अभियंता ने स्वयं कार्रवाई करने के बजाय फाइल अधीक्षण अभियंता को भेज दी, जिससे प्रक्रिया में तकनीकी आधार तैयार हो सके।
विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी निलंबित कर्मचारी की बहाली के बाद शक्तिभवन में समर्पण (Joining/Reporting) अनिवार्य माना जाता है, लेकिन इस मामले में कथित रूप से यह प्रक्रिया लागू नहीं की गई। आरोप है कि संबंधित जेई को विशेष संरक्षण मिला क्योंकि वह नोएडा के शीर्ष अधिकारी के करीबी बताए जाते हैं। यदि यह आरोप सही हैं तो यह विभागीय नियमों के समान अनुपालन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
*रोज फुंक रहे ट्रांसफार्मर, रिकॉर्ड में 'सब सामान्य'*
सूत्रों के अनुसार, नोएडा में प्रतिदिन औसतन दस या उससे अधिक ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग अथवा तकनीकी खराबी के कारण क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में केवल चुनिंदा मामलों को दर्ज किया जाता है। आरोप है कि शेष मामलों का निस्तारण आपसी सांठगांठ से बिना पारदर्शिता के कर दिया जाता है।
*सेक्टर-63 अग्निकांड भी सवालों के घेरे में*
हाल ही में सेक्टर-63 में हाईटेंशन लाइन में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी भीषण आग में एक स्कूटी जलकर नष्ट हो गई और पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए। यह घटना राष्ट्रीय स्तर की मीडिया में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुई, लेकिन आरोप है कि अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय चर्चाओं के अनुसार जांच रिपोर्टें लंबित हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया।
*UPPCL MEDIA के बड़े अहम सवाल*
- क्या सेक्टर-31 ट्रांसफार्मर प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी?
- तीन महीने तक ट्रांसफार्मर बिजलीघर से बाहर कैसे रहा?
- क्या निजी कंपनियों से सांठगांठ कर करोड़ों रुपये के ट्रांसफार्मर विभागीय प्रक्रिया से बाहर मरम्मत कराए गए?
- क्या नए एसडीओ और जेई को केवल बलि का बकरा बनाया गया?
- सस्पेंड जेई की बहाली में शक्तिभवन समर्पण की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
- क्या विभाग में कुछ अधिकारियों के लिए अलग नियम और बाकी कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था लागू है?
- सेक्टर-63 हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या शासन स्तर पर अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियंता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी?
नोट: इस समाचार में उल्लिखित कई बिंदु विभागीय सूत्रों और लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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