नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की समाजोपयोगी एवं जनकल्याणकारी सोच के अनुरूप समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा जिला कारागार में आयोजित सात दिवसीय कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता कार्यशाला का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
महिला अध्ययन केंद्र की समन्वयक प्रो. बिंदु शर्मा के मार्गदर्शन में उपसमन्वयक डॉ. वैशाली पाटिल ने जिला कारागार प्रशासन के सहयोग से इस कार्यशाला का सफल आयोजन एवं समन्वयन किया। डॉ. पाटिल ने सात दिनों की गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य महिला बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा रिहाई के उपरांत सम्मानपूर्वक समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने बताया कि सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान महिला बंदियों को हर्बल कॉस्मेटिक्स निर्माण, खाद्य संरक्षण एवं प्रसंस्करण, मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, स्वरोजगार एवं लघु उद्यम से जुड़े व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किए गए। इन प्रशिक्षणों से महिलाएं भविष्य में स्वयं का रोजगार प्रारंभ कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी, अपने परिवार की आय में योगदान दे सकेंगी तथा आत्मविश्वास के साथ समाज में नई शुरुआत कर सकेंगी। यह प्रशिक्षण उनके व्यक्तित्व विकास, मानसिक सशक्तीकरण तथा पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समापन समारोह में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य मनीषा अहलावत मुख्य अतिथि एवं कैंटोनमेंट बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष बीना वाधवा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। मुख्य अतिथि मनीषा अहलावत ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें कौशल, आत्मविश्वास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कारागार में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला बंदियों के जीवन में नई उम्मीद जगाते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां प्राप्त प्रशिक्षण महिलाओं को रिहाई के बाद सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने, आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने तथा समाज में सकारात्मक पहचान स्थापित करने में सहायक होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय एवं कारागार प्रशासन के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए इसे पुनर्वास की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया। विशिष्ट अतिथि बीना वाधवा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में नई शुरुआत करने की क्षमता होती है और सही मार्गदर्शन तथा कौशल प्रशिक्षण उस क्षमता को नई दिशा देता है। उन्होंने कहा कि हर्बल उत्पाद निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण एवं अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण महिला बंदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का भी विकास करेंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से सकारात्मक सोच अपनाकर अपने जीवन को नई दिशा देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए हर्बल साबुन, हर्बल शैंपू, विभिन्न खाद्य उत्पाद, स्क्वैश तथा आकर्षक कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। अतिथियों ने उत्पादों की गुणवत्ता, उपयोगिता एवं रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि उचित विपणन एवं प्रोत्साहन मिलने पर ये उत्पाद महिला बंदियों के लिए आय का प्रभावी स्रोत बन सकते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने कहा कि कारागार में तैयार किए जा रहे उत्पादों को समाज तक पहुँचाने के लिए उपयुक्त मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बंदियों के कौशल को पहचान मिले तथा उनके पुनर्वास की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन सके। कार्यक्रम का संचालन जेलर श्री हरबंस पांडेय एवं डॉ. पूजा चौहान ने किया तथा उप जेलर गीतिका भारद्वाज ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समारोह में उप जेलर अपूर्वा, प्रशिक्षण विशेषज्ञ डॉ. रानू गर्ग, अंजू मलिक, मेघा गुप्ता तथा छात्राएँ हर्षिता एवं वैष्णवी सहित कारागार प्रशासन एवं विश्वविद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय एवं जिला कारागार प्रशासन भविष्य में भी ऐसे कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता आधारित कार्यक्रमों का नियमित आयोजन कर महिला बंदियों के सशक्तीकरण, पुनर्वास तथा सम्मानजनक सामाजिक पुनर्स्थापना की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे।

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