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Sunday, June 14, 2026

सीसीएसयू में योग शिविर का समापन एवं महिला स्वास्थ्य हेतु नियमित योग कक्षाओं का शुभारंभ


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित नित्य योग शिविर का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। 

समापन अवसर पर योग विज्ञान विभाग के समन्वयक प्रो. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि योग दवा-मुक्त जीवन जीने का आधार है। वर्तमान भागदौड़ भरी जीवनशैली में व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होता जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कम आयु में ही शुगर, उच्च रक्तचाप, सर्वाइकल, एंजायटी एवं डिप्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी व्याधियों का बिना दवा और गोली के प्रभावी उपचार यदि कहीं है, तो वह केवल योग है। उन्होंने सभी को “नित्य योगी रहें, निरोगी रहें” का संदेश दिया। योगाचार्य अमरपाल ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ योग सत्र का शुभारंभ कराया। योग साधकों ने धीरेंद्र ब्रह्मचारी कृत सूक्ष्म व्यायाम, सूर्य नमस्कार, पश्चिमोत्तानासन, उष्ट्रासन, मंडूकासन, सुप्त वज्रासन तथा भ्रामरी एवं उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास किया। शांति पाठ के साथ योग शिविर का समापन हुआ। इस अवसर पर प्रो. राकेश कुमार शर्मा, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. वैशाली पाटिल, डॉ. अंजु मलिक, राखी सिंह, राकेश कुमार, अर्चना, विवेक कुमार, वंश चौधरी, शिवानंद सहित अनेक योग साधक उपस्थित रहे।

इसी क्रम में विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा छात्राओं एवं महिला कर्मचारियों के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से रानी लक्ष्मीबाई बालिका छात्रावास में नियमित योग कक्षाओं का शुभारंभ किया गया। यह पहल विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन एवं स्वस्थ परिसर की परिकल्पना के अनुरूप संचालित की जा रही है। महिला अध्ययन केंद्र की समन्वयक प्रो. बिंदु शर्मा की पहल पर प्रारंभ की गई इन योग कक्षाओं का उद्देश्य छात्राओं एवं महिला कर्मचारियों के बीच योग को दैनिक जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाना है। योगाचार्या राखी सिंह ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों एवं श्वास-प्रश्वास संबंधी अभ्यासों का प्रशिक्षण प्रदान किया। 

इस अवसर पर बद्ध कोणासन, उष्ट्रासन, बालासन एवं सुप्त मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास कराया गया। इन आसनों के माध्यम से पेल्विस क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होने के साथ-साथ प्रजनन एवं एंडोक्राइन तंत्र को लाभ पहुंचता है। साथ ही कमर दर्द, पेट की गैस, सूजन एवं ऐंठन जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. वैशाली पाटिल, डॉ. अंजु मलिक तथा योग विज्ञान विभाग की छात्राओं ज्योति, ओजस्वी, अंजलि, आइना एवं नंदिनी ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। 

कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर एवं शंका समाधान सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को नियमित योगाभ्यास के महत्व से अवगत कराया गया तथा प्रतिदिन योग करने के लिए प्रेरित किया गया।

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