
इंटरनेट पर इस सुंदरी को लेकर दुबई के शेखों द्वारा पूरा स्टेडियम बुक करने और मुफ्त टिकट मिलने जैसे कई भ्रामक दावे किए जाने लगे थे, लेकिन सच तो यह है कि यह मोहतरमा सिर्फ लाइक्स और व्यूज बटोरने के लिए बनाया गया एक 'एआई स्लोप' हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं।
मतलब एआई स्लोप तो अच्छे-अच्छे को चक्कर दे सकता है। अगर आप भी इस डिजिटल जाल में फंसने से बचना चाहते हैं, तो ऐसी तस्वीरों को जरा गौर से देखना सीखना होगा क्योंकि कंप्यूटर जी इंसानों ने बनाया है और वह अभी भी इतना दक्ष नहीं हुआ है कि इंसान बना देगा।
कंप्यूटर जी कुछ गलतियां कर ही बैठते हैं। तो समझिए इस काल्पनिक हसीना के चेहरे में क्या गलतियां की। पहला तो हसीना का चेहरा इतना ज्यादा चमकता है मानो फेयरनेस क्रीम की पूरी फैक्ट्री इसी के गालों पर खाली कर दी गई हो, जबकि असली इंसानों की त्वचा में थोड़े बहुत दाग-धब्बे या बनावट साफ नजर आती है।
इसके अलावा एआई सिर्फ मुख्य किरदार को चमकाने में मेहनत करता है और बैकग्राउंड में बैठे लोगों को भगवान भरोसे ही छोड़ देता है, जिससे पीछे की भीड़ के चेहरे अक्सर भूतिया, धुंधले या बिना नाक-कान के नजर आते हैं।
सबसे मजेदार बात तो यह है कि एआई को इंसानी हाथ और उंगलियां बनाने में आज भी नानी-दादी याद आ जाती है, इसलिए ऐसी तस्वीरों में अक्सर छह उंगलियां या अजीब तरह से मुड़े हुए हाथ दिख जाते हैं।
कुल मिलाकर सोशल मीडिया के इस ए आई दौर में अब 'देख कर भी यकीन मत करो' वाला नियम लागू होता है। इसलिए अगली बार जब ऐसी किसी वायरल सुंदरी पर दिल आए, तो अपनी भावनाएं हिलौरे लेने लगे और प्रेम की नदियां बहाने से पहले उसकी उंगलियां जरूर गिन लीजिएगा।—और, और भाईसाहब!
मेरी एक खास सलाह है हो सके तो एक बार आधार कार्ड से चेहरे का मिलान भी करवा लीजिएगा, क्योंकि वहां की क्रूर असलियत और एआई की इस हसीन कलाकारी का सामना होते ही सारा आशिकाना भूत वैसे ही उतर जाएगा।
— सपना सी.पी. साहू
संपादक नित्य संदेश, मध्यप्रदेश

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