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Saturday, June 27, 2026

विश्व ड्रग दिवस पर सुभारती लॉ कॉलेज में गूंजा नशा-मुक्त भारत का संकल्प

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ।  विश्व ड्रग दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा नशे के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने और स्वस्थ समाज के निर्माण के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक माननीय राजेश चन्द्र (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्ष, सुभारती लॉ कॉलेज के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।


कार्यक्रम का शुभारम्भ नशा-मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर अपने प्रेरणादायी संबोधन में माननीय निदेशक राजेश चन्द्र ने कहा कि वर्तमान समय में नशा समाज और विशेष रूप से युवाओं के समक्ष एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। यह केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक ताने-बाने और राष्ट्र की प्रगति को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना का विकास करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब देश की युवा पीढ़ी नशा-मुक्त, जागरूक और सकारात्मक सोच से परिपूर्ण होगी।


कार्यक्रम का संचालन विधि संकाय के शिक्षक श्री हर्षित द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि नशा व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं को कमजोर कर देता है और धीरे-धीरे उसे सामाजिक एवं आर्थिक रूप से भी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि नशा न केवल व्यक्ति के जीवन को अंधकारमय बनाता है, बल्कि उसके परिवार और समाज की खुशियों को भी प्रभावित करता है। अपने संबोधन में श्री हर्षित ने नशे से बचाव के प्रभावी उपायों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने नियमित एवं संतुलित दिनचर्या अपनाने, तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच विकसित करने, योग एवं व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा अच्छे सामाजिक वातावरण में रहने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि नशा-मुक्त जीवन ही स्वस्थ, सुरक्षित और सफल भविष्य की आधारशिला है तथा प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वह स्वयं भी नशे से दूर रहे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करे। 


कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी शिक्षकों एवं  शिक्षणेत्तर कर्मी वर्ग के सदस्यों ने नशा-मुक्त भारत के निर्माण हेतु सामूहिक शपथ ग्रहण की। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगे, दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे तथा स्वस्थ, सुरक्षित और नशा-मुक्त समाज के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान देंगे। यह कार्यक्रम न केवल नशे के प्रति जागरूकता फैलाने में सफल रहा, बल्कि उपस्थित प्रतिभागियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वस्थ जीवनशैली और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके संकल्प को भी और अधिक सुदृढ़ करने का माध्यम बना।

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