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Wednesday, June 24, 2026

हजरत अब्बास (अ.स.) की याद में शहर की सभी इमामबारगाहों में मजलिस और मातम का सिलसिला जारी रहा

डा. इफ्फत जकिया

नित्य संदेश, मेरठ। इमाम बारगाह छोटी कर्बला, घंटाघर, मेरठ में अशरा-ए-अज़ा-ए-हुसैनी (अ.स) की आठवीं मजलिस को संबोधित करते हुए हुज्जत-उल-इस्लाम-वल-मुस्लिमीन मौलाना सैयद अब्बास बाक़री ने कहा कि मुहर्रम-उल-हराम का आठवां दिन कर्बलाके अलम बरदार, सक्काए हरम, हज़रत अबुल फ़ाज़लिल अब्बास (अ.स) की याद से जुड़ा है। आज, पूरी दुनिया में इमाम हुसैन (अ.स.) के सोगवार हज़रत अब्बास (अ.स.) की महान कुर्बानी और बेमिसाल वफ़ादारी को श्रद्धांजलि देने के लिए अलम निकालते हैं। यह अलम न केवल हुसैनी सेना का एक स्मारक है, बल्कि इस्लाम के सम्मान, वफ़ादारी, आत्म-बलिदान और बहादुरी का एक उज्ज्वल प्रतीक भी है। 

मौलाना ने कहा कि हज़रत अब्बास (अ.स.) ने कर्बला के मैदान में वफ़ादारी की ऐसी अमर कहानी रची जिसकी मिसाल इंसानियत की तारीख़ में नहीं मिल सकती। उन्होंने पैगंबर (स.अ) के नवासे और अहले हरम की हिफ़ाज़त के लिए अपनी जान, अपने बाज़ू और अपनी पूरी ताकत कुर्बान कर दी, लेकिन इस्लाम के झंडे को गिरने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जब दुश्मन के हमले में हज़रत अब्बास (अ.स.) के दोनों हाथ कट गए, तो उन्होंने अलम को ज़मीन पर नहीं गिरने दिया बल्कि उसे अपने मुबारक दांतों से थामे रखा ताकि सच्चाई का झंडा ऊंचा रहे। मौलाना सैयद अब्बास बाक़री ने हज़रत अब्बास (अ.स.) की दर्दनाक तकलीफ़ों का ज़िक्र करते हुए कहा कि कर्बला में जो भी मुजाहिद घायल होकर ज़मीन पर आया, उसके दोनों हाथ सही सलामत थे, लेकिन जब हज़रत अब्बास (अ.स.) अपने घोड़े से ज़मीन पर आए, तो उनके दोनों हाथ कटे हुए थे। वह कर्बला की ज़मीन पर औंधे मुँह गिरे और उसी हालत में अपने आका हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) को पुकारा। इस दिल दहला देने वाले दृश्य का ज़िक्र सुनते ही वहां मौजूद सोगवारों की आंखों में आंसू आ गए और माहौल आहों, सिसकियों और आंसुओं से भर गया। मजलिस में सोज ख्वानी दानिश आबिदी और बिरादरान नें की। मजलिस के बाद हजरत अब्बास अलमदार के अलम की शबीह निकाली गई। इस परंपरागत अलम की विशेषता यह है कि इसमें जो फरेरा है उसका कपड़ा खाना - ए - काबा के गिलाफ का है । मजलिस में अंजुमन ए इमामिया मेरठ ने नौहा ख्वानी और मातम किया । वाजिद अली गप्पू ने नोहा पढ़ा।

 नमाज ज़ौहरैन के बाद मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी ने अजा खाना शाह कर्बला वक्फ मंसबिया में अपने शीर्षक " इमामत और कुरान " के तहत मजलिस को संबोधित किया। मौलाना ने मजलिस में इमाम हुसैन (अ.स.) के छह महीने के बेटे हजरत अली असगर की जालिमाना शहादत का जिक्र किया। मजलिस में सोज़ ख्वानी फिरोज अली ने की । इस मौके पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। मुहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया कि मगरिब की नमाज के बाद दिल्ली गेट थाना स्थित कोटला इमामबारगाह से जुलूस - ए - अलम निकाला गया और छोटी कर्बला इमामबारगाह होता हुआ अजाखाना शाह कर्बला पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस का अलम हसन मुर्तजा ने उठाया। जुलूस के आयोजक शब्बीर हुसैन बब्लू थे। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।

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