डा. इफ्फत जकिया
नित्य संदेश, मेरठ। रविवार को पांचवें मोर्हरम को इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में शहर के सभी इमामबाड़ों में मजलिस, मातम और जुलूस का सिलसिला जारी रहा। लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला में अशरा पढ़ने आए मौलाना सैयद अब्बास बाकरी साहब ने " इमामत, ईलाही निज़ाम - ए - हयात " शीर्षक के आधार पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि " आज पूरी दुनिया में इमाम हुसैन (अ.स) और उनके वफ़ादार साथियों की याद मनाई जा रही है, ये जिक्र दबे-कुचले और कमज़ोर देशों को हिम्मत और सब्र का पैगाम देता है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स) ने उस समय यज़ीद की ताकतवर हुकूमत के आगे झुकने के बजाय सच्चाई और इंसाफ़ का रास्ता चुना और इंसानियत को सिखाया कि ज़ुल्म के आगे कभी झुकना नहीं चाहिए।
मौलाना ने कहा कि कर्बला का यही पैगाम आज भी दुनिया के दबे-कुचले देशों के लिए रोशनी की किरण है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के दबाव और ताकत के प्रदर्शनों के बावजूद ईरान ने अपने रुख पर अडिग रहकर यह साबित कर दिया है कि सच्चाई और सब्र की ताकत बड़ी से बड़ी ताकत को चुनौती दे सकती है। आज दुनिया ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को इसी नज़रिए से देख रही है कि जब कोई देश अपने उसूलों पर अड़ा रहता है, तो वह बड़ी ताकतों के सामने भी नहीं झुकता। " अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन ( अ.स) की बहन हज़रत ज़ैनब (अ.स.) के साहब ज़ादे औन (अ.स.) और मौहम्मद (अ.स.) की दिल दहला देने वाली शहादत का बयान किया , जिन्होंने अपनी युवावस्था में अपने नाना , पैगंबर (स.अ.) के धर्म को जीवित रखने के लिए कर्बला की तपती रेत पर अपनी जान कुर्बान कर दी । मजलिस में सोज़ ख्वानी फिरोज अली ने की ।
नमाज़ ज़ौहरैन के बाद, मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी ने अज़ा खाना शाह कर्बला वक्फ़ मंसबिया में अपने शीर्षक " इमामत और कुरान" के तहत मजलिस को संबोधित किया। मजलिस के आखिर में उन्होंने हज़रत इमाम हुसैन के भांजों हजरत औन और हज़रत मुहम्मद की शहादत का बयान किया जिसे सुनकर सोगवारो की आंखों से आंसु जारी हो गए। सभी नें इमाम हुसैन की बहन हज़रत ज़ैनब को उन के पुरसा दिया । मजलिस में सोज़ ख्वानी फिरोज अली ने की । बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की ।
शहर की अन्य इमामबारगाहों में तय समय पर मजलिसें और मातम जारी रहा। मुहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया कि मनसबिया की मजलिस के बाद जुलूस ए जुल्जनाह कोतवाली थाना के बुढ़ाना गेट स्थित इमामबारगाह नवाब मौहम्मद अली खां से बरामद होकर सत्यम पैलेस रोड, खैरनगर स्टेट बैंक की इमामबारगाहों से होता हुआ छत्ता बुर्जियान की इमामबारगाह से गुजर कर लाला बाजार स्थित इमामबारगाह छोटी कर्बला पहुंचा। वहां शहर की सभी मातमी अंजुमनों ने नोहा ख्वानी की और मातम किया। वहां से जुलूस अख्तर मस्जिद, अहमद रोड, खैरनगर से होता हुआ वापस आकर बुढ़ाना गेट इमामबारगाह पर समाप्त हुआ। जुलूस के आयोजक हैदर अली और हैदर मेहदी थे। जुलूस में शहर की सभी मातमी अंजुमन ने नोहाखानी की और मातम किया ।इस अवसर पर बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल रहे ।

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