नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मेरठ में लंबे समय से रुका हुआ
हाउसिंग प्रोजेक्ट 'द ग्रांडे' आखिरकार
पूरा हो गया है और कई साल की देरी के बाद इसे घर खरीदारों को सौंप दिया गया है। दिल्ली-मेरठ हाईवे पर लगभग 12 लाख (1.2 मिलियन) वर्ग फुट में फैले इस प्रोजेक्ट में करीब
600 यूनिट्स हैं, जिनमें रहने और कमर्शियल इस्तेमाल,
दोनों तरह की जगहें शामिल हैं। ज़ेडटीए इन्फ्राटेक द्वारा प्रोजेक्ट
पूरा किए जाने के बाद, 500 से अधिक परिवारों को उनके घर सौंप
दिए गए हैं।
मूल रूप से 'प्रोव्यू ऋषभ इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड' के तहत शुरू किए
गए इस प्रोजेक्ट में प्रमोटरों के बीच विवाद, आर्थिक चुनौतियों
और जमा हुए कर्ज़ों की वजह से काफी देरी हुई। 2015 में,
स्वर्गीय अजीत सिंह जस्सर ने डेवलपमेंट को स्थिर करने और निर्माण कार्य
फिर से शुरू करने की ज़िम्मेदारी संभाली। 2016 में उनके निधन
के बाद, इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने और पूरा करने का काम
ऋतिक जस्सर ने आगे बढ़ाया और वे इसके पूरा होने तक इससे जुड़े रहे।
परियोजना के पुनरुद्धार को परिचालन
पुनर्गठन और निष्पादन पर नए सिरे से दिए गए फोकस से गति मिली। ज़ेडटीए इन्फ्राटेक ने
प्लानिंग,
काम को पूरा करने और प्रोजेक्ट को खत्म करने की ज़िम्मेदारी ली। एक बड़ी
चुनौती थी स्टेकहोल्डर्स का भरोसा फिर से जीतते हुए कंस्ट्रक्शन का काम दोबारा शुरू
करना। यह सुधार बिना किसी नए इंस्टीट्यूशनल लोन के, इन्वेंट्री
की बिक्री, कलेक्शन और अनुशासित फाइनेंशियल मैनेजमेंट के ज़रिए
हासिल किया गया।
उत्तर प्रदेश रेरा (UP RERA)
के संस्थापक अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव राजीव
कुमार के अनुसार, “बड़ी रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं
में वित्तीय, कानूनी और काम पूरा करने से जुड़ी जटिल चुनौतियाँ शामिल होती
हैं, जिनका एक साथ समाधान करना अक्सर कठिन हो जाता है। द ग्रांडे उन सफल उदाहरणों में से एक है,
जहाँ उत्तर प्रदेश रेरा (UP RERA) की निगरानी और
सुलह (कंसिलिएशन) व्यवस्था ने निर्माण कार्य
को दोबारा शुरू कराने, घर खरीदारों के साथ समझौते सुनिश्चित करने
और डेवलपर द्वारा किए गए वादों को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”
इस परियोजना को दिसंबर 2024 में ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ और 500 से अधिक
परिवारों को उनके घर सौंपे जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि
सहयोगात्मक समस्या-समाधान और केंद्रित निष्पादन संकटग्रस्त आवासीय
विकास परियोजनाओं में विश्वास को पुनर्स्थापित कर सकते हैं।

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