नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। मध्यप्रदेश में लंबे समय से विवादों में रही धार की भोजशाला को लेकर इंदौर स्थित Madhya Pradesh High Court ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक (Protected Monument) है और इसे वाग्देवी का मंदिर माना जाएगा। फैसले के बाद हिंदू पक्ष में खुशी की लहर है, जबकि प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि भोजशाला का प्रबंधन और नियंत्रण अब पूरी तरह Archaeological Survey of India (ASI) के पास रहेगा। साथ ही हिंदू समाज को यहां पूजा-अर्चना करने का अधिकार दिया गया है।
फैसले में मुस्लिम समुदाय द्वारा परिसर में नमाज़ अदा करने की अनुमति समाप्त करने की बात भी कही गई है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष को सुझाव दिया है कि वे सरकार के समक्ष किसी अन्य उपयुक्त भूमि के आवंटन के लिए प्रतिनिधित्व प्रस्तुत कर सकते हैं।
इसके अलावा कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देशित किया है कि ब्रिटेन के म्यूज़ियम में रखी वाग्देवी प्रतिमा को वापस भारत लाने संबंधी प्रतिनिधित्व पर भी विचार किया जाए। यह मुद्दा लंबे समय से हिंदू संगठनों द्वारा उठाया जाता रहा है।
फैसले के बाद धार और इंदौर में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार होने के कारण संवेदनशीलता और बढ़ गई थी, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज जुमे की नमाज़ अदा करता रहा है। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
उच्च न्यायालय इंदौर द्वारा भोजशाला धार का निर्णय हिन्दू पक्ष में करने उपलक्ष्य जिला न्यायालय में अधिवक्ता ओ ने मिठाई वितरित की , हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा हाईकोर्ट के गेट पर वाग्देवी की प्रतिमा लेकर खुशी मनाई।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
मुस्लिम पक्ष के वकील अरशद वारसी ने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसला हिंदू पक्ष के पक्ष में दिया है। फैसले में राज्य सरकार से मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने को कहा गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने पूरा फैसला नहीं पढ़ा है। मुस्लिम पक्ष इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा।



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