नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय ने सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए “ग्रीन यूनिवर्सिटी” अभियान को जनभागीदारी से जोड़ दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता, जिम्मेदारी और सतत विकास की भावना को भी मजबूत कर रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में प्रत्येक सप्ताह तीन दिनों तक “कार-फ्री डे” लागू कर एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिया है। इस पहल का उद्देश्य केवल प्रदूषण नियंत्रण नहीं, बल्कि युवाओं और समाज को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना भी है। निजी पेट्रोल और डीजल वाहनों के सीमित उपयोग से परिसर में स्वच्छ वातावरण का निर्माण हो रहा है तथा विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी सामूहिक रूप से हरित जीवन शैली को अपनाने की दिशा में प्रेरित हो रहे हैं। जल संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए विश्वविद्यालय परिसर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की प्रभावी व्यवस्था विकसित की गई है। यह पहल जल संकट जैसी गंभीर समस्या के प्रति समाज को जागरूक करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश भी दे रही है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए परिसर में बैटरी रिक्शा, इलेक्ट्रिक कार और ई-स्कूटर जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आने के साथ-साथ विद्यार्थियों और आगंतुकों के बीच पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाने की प्रेरणा भी मिल रही है। विश्वविद्यालय की यह पहल आधुनिक तकनीक और सामाजिक चेतना के संतुलित समन्वय का उदाहरण बन रही है।
ऊर्जा संरक्षण की दिशा में विश्वविद्यालय परिसर में सौर ऊर्जा आधारित सोलर लाइट्स स्थापित की गई हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से विश्वविद्यालय यह संदेश दे रहा है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यह पहल विद्यार्थियों के भीतर ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास के प्रति सकारात्मक सोच विकसित कर रही है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय समय-समय पर वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न सामाजिक अभियानों का आयोजन भी करता रहता है। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति दायित्व बोध से भी जुड़ी हुई है।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की यह हरित और सामाजिक पहल आज के समय में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है। विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में जागरूक एवं प्रेरित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी कर रहा है।
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