तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ: शहर में इन दिनों हालात कुछ ऐसे नजर आ रहे हैं कि आम जनता के बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है—आखिर और कितने ह्लअच्छे दिनह्व आएंगे? एक तरफ व्यापारी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के डर से परेशान हैं, तो दूसरी ओर आम लोग गैस सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में लगने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं। वहीं गरीब तबका राशन की अनियमितता को लेकर चिंता में है।
गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखकर कई लोगों को करीब 20 साल पहले का दौर याद आ गया, जब सिलेंडर के लिए घंटों लाइन लगानी पड़ती थी। शहर के कई इलाकों में इन दिनों वही पुराने दृश्य फिर दिखाई दे रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को भी गैस लेने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ लोग यह भी कहते नजर आए कि हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें कोरोना काल का समय याद आने लगा है। लोगों का कहना है कि उस समय कई जरूरी सामान अपेक्षाकृत सस्ते भी थे और आसानी से मिल भी जाते थे, जबकि आज कई जगहों पर आम जरूरत की चीजों के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है।
दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में तेल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। सरकार का दावा है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
हालांकि जमीनी स्तर पर दिखाई दे रही समस्याएं और जनता की शिकायतें यह संकेत देती हैं कि व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। जब व्यापारी अपने रोजगार को लेकर चिंतित हों और आम जनता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कतारों में खड़ी दिखाई दे, तो यह स्थिति प्रशासन के लिए भी एक गंभीर संकेत बन जाती है।
अब देखना यह है कि सरकार के सख्त निर्देश और दावे जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी असर दिखाते हैं और आम जनता को इन परेशानियों से कब राहत मिलती है।

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