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Saturday, January 10, 2026

रचनाधर्मिता और आत्मीयता से सराबोर रहा वामा साहित्य मंच का स्थापना दिवस

सपना सीपी साहू 
नित्य संदेश, इंदौर। वामा साहित्य मंच का स्थापना दिवस समारोह ऊर्जा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ, जहां साहित्य और संवेदना का अनूठा संगम देखने को मिला।
 
कार्यक्रम की प्रारंभ में मधुरिम सरस्वती वंदना अनुपमा गुप्ता ने प्रस्तुत की। स्वागत वक्तव्य देते हुए अध्यक्ष ज्योति जैन ने वामा सखियों के अपनत्व और अनुशासन की प्रशंसा की और बताया कि किस तरह वरिष्ठों के मार्गदर्शन ने कनिष्ठ सदस्यों को सृजन के नए आयाम छूने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने सभी सखियों को ज्योतिपुंज की संज्ञा दी। तत्पश्चात सचिव स्मृति आदित्य द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद विचार अभिव्यक्ति सत्र 'वामा सखियों के जज़्बात जुड़े हैं वामा के साथ' का आयोजन हुआ। इस सत्र में डाॅ. स्नेहलता श्रीवास्तव ने वामा साहित्य मंच के अपनत्व, समय प्रबंधन और स्नेह की सराहना करते हुए प्रोत्साहित करती कविता सुनाई। लेखिका सपना सी.पी. साहू स्वप्निल ने संस्था को अपना दूसरा मायका बताया जिसमें उन्हें लेखिकाओं के रूप में बड़ी और छोटी बहनों का साथ मिला है। 

प्रतिभा जोशी ने इसे निरंतर प्रोत्साहित करने वाली अपनी सी संस्था कहा। आशा गुप्ता ने साझा किया कि वामा से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मकता आई है और यहाँ की प्रतिबद्धता ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है। महिमा शुक्ला ने वामा से जुड़ना एक सुखद अनुभव बताया और यहाँ सभी को मिलने वाले समान अवसरों की प्रशंसा की।

निधि जैन ने इसे साहित्य मंच से बढ़कर स्त्रियों को आगे बढ़ाने वाली संस्था कहा। अवंति श्रीवास्तव ने मंच को भावनाओं का समुद्र बताते हुए कहा कि यहां जुड़कर सब मैं से हम हो जाते हैं। पुष्पा दसौंधी ने बताया कि यहां उन्हें मधुर स्वभाव वाली सखियाँ मिली हैं जो जीवन के उत्तरार्ध में भी जीने का उत्साह भर देती हैं। अनीता जोशी को मंच से जुड़कर नई पहचान मिली है और उनके अनुसार यहाँ की सखियाँ एक-दूसरे को प्रोत्साहित कर मनोचिकित्सक की भूमिका निभाती हैं। 

भावना दामले ने इसे मिलजुलकर काम करने वाली संस्था बताया। शांता पारेख ने मंच को भावनात्मक जुड़ाव और साहित्य सृजन को प्रेरित करने वाला बताया। भावना बर्वे ने साहित्य सृजन के सफर में वामा से मिली सकारात्मक ऊर्जा पर आत्मीय चर्चा की।

सभी वक्ताओं ने साझा किया कि किस तरह इस मंच ने उनकी रचनाधर्मिता को नए पंख दिए हैं। संस्था की आधार स्तंभ शारदा मंडलोई सहित सभी सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस वार्षिक उत्सव को नूतन उमंग प्रदान की। कार्यक्रम की संयोजक वैजयंती दाते रहीं और सफल संचालन डॉ. दीपा मनीष व्यास ने किया। अंत में कोषाध्यक्ष रुपाली पाटनी ने आभार व्यक्त करते हुए सभी सदस्यों के साथ साहित्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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