— सरूरपुर में उमड़ा उल्लास, हर चेहरे पर सजधज और मुस्कान का रंग
मोहम्मद अली चौहान
नित्य संदेश, सरूरपुर। क्षेत्र में करवा चौथ का पर्व परंपरा और प्रेम का प्रतीक बनकर छा गया। सुबह से ही सुहागिनों में अपार उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर सजधज कर मां गौरी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। शाम होते ही नगर की गलियाँ मेंहदी की खुशबू और दीपों की झिलमिलाहट से महक उठीं।
नगर पंचायत हर्रा, करनावल, खिवाई और आसपास के गांवों पांचाली जैनपुर,मैंनापुट्टी,सरूरपुर,डाहर,गोटका, भूनी में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर घरों और मंदिरों में करवा चौथ की पूजा संपन्न की। कई स्थानों पर सामूहिक पूजन का आयोजन हुआ, जहां कथा सुनकर सुहागिनों ने अपने पतियों की दीर्घायु और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना की। जैसे ही आसमान में चाँद की पहली झलक दिखाई दी, महिलाएं थाल सजाकर छतों और बालकनियों पर उमड़ पड़ीं। छलनी से चाँद और फिर अपने पति का चेहरा निहारते हुए उन्होंने जल अर्पित किया और व्रत का पारण किया। इस पल का भावनात्मक दृश्य देखने लायक था — जहाँ हर पत्नी की आँखों में श्रद्धा, प्रेम और संकल्प झलक रहा था। बाजारों में भी दिनभर करवा चौथ की रौनक छाई रही। ब्यूटी पार्लर, साड़ियों और मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ लगी रही। चूड़ियाँ, सिन्दूर, करवे और सजावटी थालियों की बिक्री ने बाजारों को गुलजार कर दिया। हर्रा के सर्राफा बाजार में पतियों ने अपनी पत्नियों के लिए आभूषणों की जमकर खरीदारी की।
प्रिंस ज्वैलर्स के मालिक फैज़ान राणा ने बताया कि इस करवा चौथ पर सबसे ज्यादा सोने की चेन और अंगूठियों की बिक्री हुई। हर्रा की नूपुर,करनावल की हेमलता, सरूरपुर की अर्चना चौधरी,पाँचली की पूजा चौहान के साथ-साथ हर्रा की निशा चौहान ने कहा कि “करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, भरोसे और आस्था का पर्व है। इस दिन हर सुहागिन अपने जीवनसाथी की सलामती और साथ की दुआ करती है।
इस अवसर पर नगर पंचायत हर्रा की अधिशासी अधिकारी नीति गुप्ता ने भी क्षेत्र की महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि करवा चौथ भारतीय संस्कृति की सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है, जो न सिर्फ दांपत्य प्रेम का प्रतीक है बल्कि स्त्री के संकल्प, श्रद्धा और त्याग की मिसाल भी है। हमें गर्व है कि हमारी नगर पंचायत की महिलाएं इस पर्व को पूरे उत्साह और मर्यादा के साथ निभा रही हैं।
करवा चौथ के इस पावन अवसर पर सरूरपुर क्षेत्र प्रेम, श्रद्धा और उत्सव की एक सुंदर तस्वीर में ढल गया। हर चेहरे पर सिन्दूर की लाली, चूड़ियों की खनक और दिलों में आस्था की रौशनी बिखरी रही।
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