-पुलिस-प्रशासन और आयोजकों के बीच हुई नोकझोंक, भूमि पूजन का मुहूर्त
निकला
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। रामभद्राचार्य जी कथा के आयोजन को लेकर विवाद हो गया। अनुमति को लेकर कथा आयोजक और पुलिस प्रशासन के बीच करीब एक घंटे तक नोकझोंक हुई।
मामले की जानकारी राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी को हुई। राज्यसभा सांसद
लक्ष्मीकांत वाजपेयी मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों में मध्यस्ता कराई।
इसके बाद ही भूमि पूजन हो सका। इस दौरान भूमि पूजन का शुभ मुहूर्त निकल गया।
भामाशाह पार्क में 8 सितंबर से कथा होनी
है।
श्रीराम कथा का आयोजन दिव्य शक्ति ट्रस्ट करा रहा है। ट्रस्ट की ओर से श्री
श्री 108 महामंडलेश्वर मां
लाडलीनंद सरस्वती महाराज व अन्य साधु संत भामाशाह पार्क में भूमिपूजन के लिए दोपहर
12.30 बजे पहुंच गए। आयोजकों ने वहां
पहुंचने के बाद भूमिपूजन की तैयारी शुरू कर दी। तभी कथास्थल पर एडीएम और एसपी
पहुंच गए। एसपी ने आयोजकों से कहा कि भूमिपूजन यहां नहीं हो पाएगा। क्योंकि आयोजन
की अनुमति नहीं हैं। बस यहीं से विवाद शुरू हो गया। मां लाडलीनंद सरस्वती ने कहा
कि हमने इसी स्थल को कथा के लिए चुना है। क्योंकि यहां बड़ा मैदान है। शहर के बीच
का इलाका है। पार्किंग की भी समस्या नहीं होगी और भक्तगण आसानी से आ जा सकेंगे।
लेकिन अफसरों ने कहा कि यहां कथा की अनुमति नहीं मिली है। इसलिए हम यहां भूमिपूजन
नहीं करा सकते। इसी बात पर बहस बढ़ती चली गई।
आयोजक बोले: हमने कर रखा है आवेदन
आयोजकों ने बताया, हमने अनुमति के लिए आवेदन दिया है। अगर यहां कथा नहीं होगी तो
कथा कहां होगी? लंबे समय से हम कथा की तैयारी कर रहे हैं।
आयोजन स्थल भी यही है। आज भूमिपूजन होना है। इस समय इस तरह हमें भूमिपूजन से रोका
जा रहा है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया, आयोजन की अनुमति नहीं हैं। इसलिए भूमिपूजन नहीं होगा। इसको लेकर कथा आयोजकों
और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
जहां हुआ पूजन, वही
होगी कथा
करीब एक घंटे तक कथा आयोजकों और पुलिस के बीच बहस हुई। जानकारी होने पर
राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी पहुंचे। करीब दो बजे उनकी मध्यस्थता में भूमि
पूजन हुआ। डॉ. लक्ष्मीकांत
वाजपेयी ने कहा कि व्यवस्था बनाने में असमर्थ है तो उसका नाम प्रशासन नहीं है। कहा
कि जहां पर भगवान का भूमिपूजन हो गया वहां कथा होगी। व्यवस्था करने का काम प्रशासन
का है। कहा कि मुझे खुद यहां पर आकर आश्चर्य हो गया। जब मैंने यहां पर
अफसरों की गाड़ियां खड़ी देखी कि अफसर इतने धार्मिक कब से हो गए कि कथा के भूमिपूजन
में आने लगे। आगे कहा कि परमिशन न देना ये इनकी गलत बात है परमिशन इनको विचार करके
देना चाहिए।
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