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Friday, August 29, 2025

बच्चे आपके-संस्कार किसके? हिंदी संस्करण का हुआ लोकार्पण

 



नित्य संदेश ब्यूरो

नई दिल्ली। शोभित विश्वविद्यालय और इंफिनिटी फाऊंडेशन इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र प्रगति मैदान नई दिल्ली में प्रसिद्ध चिंतक एवं अंतर्राष्ट्रीय लेखक राजीव मल्होत्रा और शह लेखिका विजय विश्वनाथन की चर्चित कृति हूं रेसिंग योर चिल्ड्रन के हिंदी अनुवाद" बच्चे आपके संस्कार किसके" का भव्य लोकार्पण हुआ।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र ने की उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि बच्चों को गढ़ने का कार्य कौन कर रहा है - माता-पिता और शिक्षक या फिर वैश्विक मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और उपभोक्तावादी प्रवृत्तियां? महाभारत के अभिमन्यु की तरह हमारे बच्चे ज्ञान और तकनीक के चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो जानते हैं परंतु बाहर निकलने का मार्गदर्शन उनके पास नहीं है। शिक्षा केवल तभी सार्थक है जब वह संस्कारों से जुड़ी हो। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को इस चुनौती का साहसिक उत्तर बताते हुए कहा कि यह मातृभाषा, मूल्य आधारित शिक्षा और समग्र विकास पर बल देती है। शोभित विश्वविद्यालय सदैव एजुकेशन विद परपज की परंपरा पर चलता आया है और यह पुस्तक इस उद्देश्य को प्रतिद्वनित करती है।

 




लेखक राजीव मल्होत्रा जो 3 दशकों से भारतीय दृष्टि से वैश्विक विमर्श को चुनौती देते आ रहे हैं ने अपने वक्तव्य में कहा आज का सबसे बड़ा संकट यह है की माता-पिता ने यह मान लिया है कि बच्चों का निर्माण केवल विद्यालय करेंगे। परंतु विद्यालय भी अब वैश्विक बाजारवादी सोच और उपभोक्तावादी मानको से संचालित हो रहे हैं। बच्चों का मन आज का सबसे बड़ा युद्ध क्षेत्र है। यह युद्ध केवल केवल राष्ट्र के निर्माण नहीं बल्कि विचारधाराओं के बीच है। एक अदृश्य तंत्र जिसे हम दीप स्टेट कह सकते हैं- वैश्विक मीडिया, डिजिटल एल्गोरिथम, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और विदेशी पाठ्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी के मानस को नियंत्रित कर रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल वैश्विक उपभोक्ता बनाना है ना कि अपनी जड़ों से जुड़े नागरिक। यदि भारत अपनी शिक्षा और संस्कारों के प्रति सजक नहीं हुआ तो हमारी नई पीढ़ी आर्थिक रूप से सक्षम लेकिन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से पराधीन हो जाएगी यह पुस्तक हर माता-पिता हर शिक्षक और हर नीति निर्माता से प्रश्न पूछता है कि आप अपनी संतान की सोच और भविष्य को किसके हाथों में सौंप रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे आपके संस्कार किसके केवल एक पुस्तक नहीं बल्कि एक घोषणा पत्र है- संस्कार, पहचान और स्वतंत्रता की रक्षा का।

 


शह लेखिका विजय विश्वनाथन ने कहा कि बच्चे आज सबसे अधिक समय स्क्रीन पर बिताते हैं। यह पुस्तक अभिभावकों को पुनः यह सोचने पर मजबूर करेगी कि वह बच्चों से संवाद कैसे जीवित करें और उन्हें अपनी परंपरा से कैसे जोड़े। पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल जी ने कहा कि यदि बच्चे अपनी जड़ों से कटेंगे तो राष्ट्र का भविष्य भी असुरक्षित होगा। राष्ट्र निर्माण घर और परिवार से ही शुरू होता है। विनय रोहिल्ला उपाध्यक्ष उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा केवल जानकारी का हस्तांतरण नहीं है बल्कि चरित्र निर्माण का मार्ग है। तकनीकी दक्षता तभी सार्थक है जब उसमें मूल्य जुड़े हो। न्याय मूर्ति श्री राजेश टंडन पूर्व न्यायाधीश उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कहा कि न्याय का आधार केवल कानून नहीं बल्कि संस्कारिक नागरिक है यदि बच्चों में सत्य निष्ठा और नैतिकता बचपन से डाली जाए तो अपराध स्वतः कम हो जाएंगे। अनुराग शर्मा हिंदी संपादक ने कहा कि हिंदी अनुवाद का उद्देश्य यह है की पुस्तक का संदेश हर भारतीय परिवार तक पहुंचे। मातृभाषा में विचार गहराई से असर डालते हैं।


संक्रांत सानू संस्थापक गरुड़ प्रकाशन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हिंदी संस्करण समय की मांग थी। यह पुस्तक केवल प्रश्नचिन्ह नहीं उठाती बल्कि उत्तर भी देती है. समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से शिक्षाविद् ,न्यायविद, नीति निर्माता लेखक सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शोभित विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति संकाय अध्यक्ष और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इस विमोचन को केवल साहित्यिक आयोजन ने रहकर एक गंभीर शैक्षणिक सांस्कृतिक विमर्श बना दिया।


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