युवा
कलाकारों की ख्याल, तराना, ध्रुपद धमार, भजन, गजल, ठुमरी, दादरा, तबला
व कथक नृत्य प्रस्तुति ने सभी को किया मंत्रमुग्ध
अनम शेरवानी
नित्य संदेश, मेरठ। उप्र संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, संस्कृति
विभाग मंत्रालय के तत्वावधान में उप्र संगीत नाटक अकादमी की स्वर्णीम जयंती पर भारतीय शास्त्रीय
गायन, वादन व नृत्य के प्रतिभाशाली प्रतिभागियों की खोज व
शास्त्रीय संगीत को सहेजने के इस प्रयास में उप्र संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में स्वामी
विवेकाननद सुभारती विश्व विद्यालय संभाग में युवा वर्ग के
शास्त्रीय गायन वादन व नृत्य प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया।
ललित
कला संकाय के सत्यजीत रे प्रेक्षाग्रह में कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के
कुलपति मेजर जनरल डॉ. जीके थपलियाल, ललित कला संकाय के प्राचार्य प्रो. डॉ.
पिंटू मिश्रा, मंच कला विभाग की अध्यक्षा प्रो. डॉ.
भावना ग्रोवर, समस्त निर्णायक मंडल व प्रतियोगिता प्रभारी पवन कुमार द्वारा
द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर ललित कला संकाय के विद्यार्थियों
द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति की गई। प्रतियोगिता में मेरठ व अन्य
क्षेत्रों मे आये 20 से 25 वर्ष के युवा कलाकारों की ख्याल, तराना, ध्रुपद
धमार, भजन, गजल, ठुमरी, दादरा, तबला
व कथक नृत्य की प्रतियोगिता में प्रतिभागिता रही। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल
में देश के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने शिरकत की। निर्णायक मंड़ल में गायन विधा में
लखनऊ के भातखंड़े संस्कृति विश्वविद्यालय से आई सुप्रसिद्व गायिका प्रो.
सृष्टि माथुर, जलज श्रीवास्तव व आयुष द्विवेदी रहें, इसी
श्रृंखला में कथक की सुप्रसिद्व नृत्यांगना सुश्री मंजू मलकानी व तबले के निर्णय
में सौरभ सिंह रहे।
प्रतियोगिता
में प्रतिभागियों ने कड़ी चुनौती के साथ इस स्पर्धा को पूर्ण किया। गायन की ख्याल
शैली में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रतिभागिता दी।
गायन विधा के निर्णायक के रूप में प्रो. सृष्टि माथुर, जलज
श्रीवास्तव व आयुष द्विवेदी ने अपने कुशल निर्णय देकर प्रतिभागियों का चयन किया।
शास्त्रीय गायन की ख्याल शैली में आलिया खान ने राग किरवानी गाकर अपनी गायन की छाप
से निर्णायक मंडल को आनन्दित कर द्वितिय स्थान प्राप्त किया, वही
आलिमा खां ने ठुमरी/दादरा गायन शैली के अंतर्गत राग पहाड़ी में आज हूं सजनिया श्याम
नही आये गाकर प्रथम स्थान पर अपना अधिकार जमाया। गायन की दूसरी श्रेणी सुगम
संगीत के भजन शैली में प्रथम स्थान आलिया खां ने राग मिश्र भैरवी में अब मोरी
राखों लाज हरि, गाकर प्रथम स्थान, आयुष ने द्वितीय स्थान एवं रितिक
ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।। गज़ल गायकी में प्रथम स्थान आलिमा खां ने प्राप्त
किया। वहीं शास्त्रीय नृत्य कथक शैली में प्रियांशी यादव, श्रेया
त्यागी, पीहू
सिघंल, आयुषी
नरूला, खुशी
मल्हौत्रा, अंकित कुमार व गुन गोयल व अन्य छात्र -छात्राओं ने
प्रस्तुति दी। कथक नृत्य में प्रथम स्थान खुशी मल्होत्रा व आयुषी नरूला का रहा, द्वितीय
स्थान गुन गोयल व तृतीय स्थान पर अंकित राजपूत रहे इन सभी प्रतियोगिताओं में प्रथम
स्थान प्राप्त करने वाले प्रतियोगियों को पुनः लखनऊ में कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए
पुनः आमंत्रित किया जाएगा, जिसमें सभी 18 संभागों से चयनित प्रथम पुरस्कृत प्रतिभागियों की
प्रतियोगिता होगी।
इस
प्रतियोगिता के संयोजक लखनऊ से आये सुप्रसिद्व तबला वादक डॉ. पवन
कुमार रहे। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित सफल
आयोजन के लिए विश्वविद्यालय की सीईओ डॉ. शल्या राज, कुलपति डॉ. जीके
थपलियाल, संकाय
के प्राचार्य प्रो. डॉ. पिंटू मिश्रा एवं विभागाध्यक्षा प्रो. डॉ.
भावना ग्रोवर को कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी। प्रतियोगिता में सभी
प्रतिभागी उत्साह से लबरेज दिखे, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जीके थपलियाल ने सभी प्रतिभागियों का
उत्साह वर्धन किया। कार्यक्रम की उद्घोषिका डॉ. श्वेता
चौधरी रही।
सुभारती
विश्वविद्यालय में कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. डॉ. भावना ग्रोवर ने कार्यक्रम के अंत
में सचिव संस्कृति मंत्रालय, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित
नाहर व सभी गणमान्य निर्णायक मंडल, प्रतियोगीता प्रभारी पवन तिवारी व
सभी भागी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. अंशु
श्रीवास्तव, डॉ. अपर्णा काम्बोज, ड़ॉ. इंद्रेश मिश्रा, डॉ. दीपक सिहं, अभिषेक
मिश्रा, निशि
चौहान, श्वेता सिंह, अक्षय
शर्मा, भुवन
भटनागर, देवसुनि, डॉ. वन्दना
तोमर, लक्की
त्यागी का सहयोग रहा। आयोजन में सांगितिक संगति मेहराज व खान, फरदीन
खान द्वारा की गई।
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