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Wednesday, October 9, 2024

विधायक अतुल प्रधान के धरना प्रदर्शन के मायने, ये आंदोलन क्यों जरूरी? सीनियर जर्नलिस्ट शाहिद खान की एक रिपोर्ट


नित्य संदेश ब्यूरो 
डेस्क। वह आंदोलन करे हम समाज सेवा करेंगे, यह अच्छी सोच है अच्छा वाक्य है, लेकिन क्या ये सच है? जो आज ये डॉक्टर्स कह रहें हैं, और समाज सेवा की बात आज ही क्यू कहने की ज़रूरत पड़ी, जब आज सरधना विधायक अतुल प्रधान डॉक्टर्स की मनमानी के खिलाफ़ मोर्चा खोलने के लिए बैठे हैं। 

डॉक्टर्स और स्कूल की मनमानी ने आज आम आदमी की जिंदगी को मुश्किल हालात मे डाल दिया है, गरीब आदमी ना आज अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा दिला पा रहा है, ना आज अपने बीमार पड़े परिजनो का सही से इलाज करा पा रहा है। आखिर क्यू, इस क्यू का जवाब ना सरकार के पास है, ना किसी भी पार्टी के नेता के पास है। आम आदमी जब किसी अपने का इलाज करने के लिए, किसी भी नर्सिंग होम में पहुंचता है तो मरीज के एडमिट होते ही चार से ₹5000 की दवाई का पर्चा उसे पकड़ा दिया जाता है। अब वह दवाई इस नर्सिंग होम के आसपास या नर्सिंग होम के अंदर बने हुए मेडिकल स्टोर पर मिलती है। मरीज के परिजन की मजबूरी बन जाती है, उसे इस वक्त दवाई लेना। आज जो नर्सिंग होम में रूम मिलता है वह किसी फाइव स्टार होटल के किराए से काम नहीं होता, आखिर क्या कारण है कि 2000 से लेकर ₹10000 तक का रूम मिलता है। 

नर्सिंग होम में अब डॉक्टर साहब आते हैं, अपने पेशेंट को देखने, वह दिन में दो बार आते हैं तो दोनों बार फीस लेते हैं। सारे टेस्ट होते हैं, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और अन्य कोई भी टेस्ट या एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगा हो तो हर चीज के पैसे डबल टेबल चार्ज किए जाते हैं, जहां एक एनेस्थीसिया का इंजेक्शन ₹2000 में लगता है, वही एनेस्थीसिया का इंजेक्शन ₹10000 में भी लगता है, क्या कारण है इस लूट का? कोई जवाब देने को तैयार नहीं है. नर्सिंग होम के बिल लाख चार लाख तक के बनते हैं, बिना किसी वजह के वेंटिलेटर पर रख दिया जाता है, 60% के शव में देखा गया है कि वेंटिलेटर पर केवल पैसे बनाने के लिए ही मरीज को रखा जाता है, ना तो डॉक्टर, ना ही नर्सिंग होम वाले यह देखते कि मरीज की माली हालत क्या है, उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं, कई बार तो देखा गया है कि मरीज की मौत हो गई है और उसके बाद पैसों की डिमांड की जाती है कि आप बिल जमा कीजिए, तब आपको शव ले जाने देंगे। 

मेडिकल लाइन इतनी बड़ी और इतनी पावरफुल हो चुकी है कि कोई बड़ा आदमी हो या कोई छोटा आदमी हो, मेडिकल के लिए सब एक समान है। सबसे पैसा वसूला जाता है, शहर के एक बड़े बीजेपी के नेता के साथ रहने वाले नेहरू नगर फूलबाग कालोनी के निवासी हैं, जिनके भाई का एक डॉक्टर ने गदूद का गलत ऑपरेशन कर दिया था, लेकिन शहर के एक बड़े बीजेपी के असरदार नेता के करीबी होने के बावजूद भी उनके साथ कोई इंसाफ नही हुआ और ना ही उस गलत ऑपरेशन करने वाले dr का कुछ बिगड़ा, बल्कि उसने इक और संस्थान खड़ा कर लिया, बिना किसी परमिशन के, ये तो इक बीजेपी के करीबी का मामला है, अब किसी और का क्या होता होगा ये विचारणीय है। 

अभी कुछ दिन पहले rohta रोड पर इक महिला का बाइक से एक्सिडेंट हुआ, वो नजदीकी जेपी हॉस्पिटल मे गई, वहा dr Pardeep Sharma ने बड़ी अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कहा ये सांसद के प्रतिनिधि का हॉस्पिटल है, अभी थप्पड़ मार दुंगा और थप्पड़ मारने की बात कई बार दोहराई। मेरे पूछने पर की इन्हे कहा चोट आई तो वो कहने लगे कुछ नही है, कुछ चोट नही आई, पैसे ऐंठने के चक्कर मे पड़ी है। ये भाषा थी इक महीला के लिए और जब ये पूछा की इनका बिल कितना हुआ तो dr, साहब ने बताया 1800 रू हो गये, अरे हमने कहा कोइ चोट नही है कोई बॉटल भी नही चढ़ी आधे घण्टे मे 1800 रू कैसे हो गए, कोई जवाब नही था, इस सवाल का dr, साहब के पास, ये हाल है।

मै किसी धरने प्रदर्शन के समर्थन की बात का पक्षधर नही हु, लेकिन जो आज अतुल प्रधान कर रहे है वो आम आदमी और गरीब आदमी की पीड़ा है। कोई भी गर्भवती महीला किसी भी नर्सिंग होम मे जाती है तो जाते ही 4 5 हज़ार रू की दवाई मंगा लेते हैं, एक घंटे बाद डिलिवरी हो जाती है। बताइए उस दवाई का क्या हुआ? मेडीकल मे जूनियर dr कभी भी हड़ताल पर चलें जाते है, जबकि कई बार मरीज़ की गलती भी नही होती, फिर भी मरीज़ पर मुक़दमा होता है, कोई सुनने वाला नही है आम आदमी की, 

गरीब आदमी की पढ़ाई इतनी महंगी, कि घर चलाना और बच्चो को पढ़ाना मुश्किल ही नही नामुमकिन है। आज dr, के मंच पर सत्ता पक्ष के सांसद बैठे हैं तो डॉक्टर्स प्रफुल्लित है कि हमारा क्या होगा?  ये मामला ना किसी पार्टी का है ना किसी खास का, ये आम आदमी की समस्या है, सबको इसमें शामिल होना चाहिए।

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