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Tuesday, September 10, 2024

मेडिकल कॉलेज ललितपुर में मनाया गया आत्महत्या रोकथाम जागरूकता दिवस


नित्य संदेश ब्यूरो 
ललितपुर। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ललितपुर प्रधानाचार्य डॉक्टर द्विजेंद्र नाथ की अध्यक्षता में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आत्महत्या रोकथाम जागरूकता दिवस" (वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे ) मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम समस्त मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया गया। 

सर्वप्रथम डॉ वी.डी. पांडे मीडिया प्रभारी द्वारा मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में संक्षिप्त उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया गया। डॉ. सुनैना सूद मनोचिकित्साक सहायक आचार्य मनोचिकित्सा विभाग द्वारा बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि आजकल हमारे यहां आत्महत्या के केस प्रतिदिन बढ़ रहे हैं और ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को किसी भी तरह की कोई मानसिक रोग या होता है तो वह उसे छुपाना नहीं चाहिए और तुरंत उसे चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए, साथ ही उनके द्वारा यह भी बताया गया कि इसके लिए शासन द्वारा एक हेल्पलाइन नंबर 17008914416 भी जारी किया गया है। इस पर कॉल करके भी चिकित्सक से परामर्श कर सकते हैं।

राम चांदनी साइकाइट्रिक नर्स द्वारा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा गया कि यह हमारे देश में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग सबसे अधिक सुसाइड कर रहे हैं इसके लिए शासन द्वारा इस कार्यक्रम को अधिक से अधिक प्रसारित करने हेतु निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी मानसिक रोग से संबंधित व्यक्ति टोल फ्री नंबर एवं चिकित्सालय में आकर बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी समस्याओं को बता सके और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त सकता है।

 डॉ पवन सुद वरिष्ठ फिजीशियन ने बताया कि सुसाइड डिजीज को ट्राईजैमिनल न्यूरेजीलिया कहते हैं। सर्वाधिक आत्महत्या साउथ कोरिया में अवसाद के कारण होती है। लुधियाना सबसे कम अवसाद तथा जापान सर्वाधिक मानसिक स्वास्थ्य डिजीज, स्वीडन में सर्वाधिक मानसिक बीमारी, अवसाद, घबराहट, एंजायटी की बीमारी 60 वर्ष से अधिक उम्र में होती है

 डॉ मीनाक्षी सिंह मुख्य चिकित्सा अधीक्षका।द्वारा बताया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में लगभग हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति सुसाइड करता है। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम का प्रचार प्रसार एवं इसकी जानकारी अधिक से अधिक सभी व्यक्ति को होना बहुत जरूरी है ताकि आत्महत्या करने वाले लोगों को परामर्श कर उनके जीवन को बचाया जा सके। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ इम्तियाज अहमद।द्वारा बताया गया कि मानसिक रोग के मरीज का बढ़ाने का एक कारण यह भी होता है कि आजकल समाज में हम लोगों से तुलना करने लगते हैं कि डॉक्टर का बच्चा डॉक्टर ही बने इंजीनियर का बच्चा इंजीनियर ही बने इस तरह की तुलना करने से बच्चों पर मानसिक प्रेशर या दबाव बढ़ता है जिसके कारण कभी-कभी बच्चे आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं तो हमें इस तरह की तुलना नहीं करना चाहिए और हमेशा लोगों की बौद्धिक क्षमता का आकलन करते हुए ही उन पर बार डालना चाहिए

 प्रधानाचार्य डॉक्टर द्विजेंद्र नाथ ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा संचालित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण प्रोग्राम के आयोजन एवं प्रचार प्रसार हेतु आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम मैं उपस्थित समस्त चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ एवं मैनेजमेंट स्टाफ को धन्यवाद ज्ञापन किया एवं इसके पश्चात प्रधानाचार्य द्वारा बताया गया कि टीवी सिनेमा देख कर व्यक्ति अपनी तुलना अन्य किसी दुसरे व्यक्ति से करके अवसाद की स्थिति उत्पन्न कर लेता है। व्यक्ति को हमेशा अपने आप पर आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए। आप किसी दूसरे व्यक्ति से अपनी तुलना कर समस्या उत्पन्न न करें। जब हम दूसरे व्यक्ति से अपनी तुलना करते हैं तो कई समस्याएं उत्पन्न होने लगती है इसलिए हमें हमेशा एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी से बराबरी नहीं करना चाहिए कोई भी व्यक्ति किसी के बराबर या एक जैसा नहीं होता है। प्रधानाचार्य द्वारा आधार एवं बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का उदाहरण देते हुए जिस प्रकार आधार और फिंगरप्रिंट एक दूसरे के मैच नहीं हो सकते उसी प्रकार हर व्यक्ति एक अपने आप में यूनिक अर्थात स्पेशल होता है एक साधारण व्यक्ति ऊंचाइयों को छू सकता है। प्रधानाचार्य द्वारा यह भी बताया गया कि हमारे महापुरुष जैसे महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, पैगंबर साहब एवं ओबामा जैसे व्यक्तित्व की अगर हम जीवनी पढ़ते हैं तो वह हमें बहुत कुछ सीखते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में बिना व्यक्तिगत संपदा के भी कैसे आगे बढ़कर महान बन सकते हैं। इसलिए हमें कभी भी निराश नहीं होना चाहिए लगातार मेहनत और परिश्रम करते रहें ताकि किसी भी विपरीत परिस्थितियों में हम अपने आप को डाल सके और आत्महत्या जैसे ख्याल हमारे दिमाग में ना में भी आए।

कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर डॉक्टर देश निधि सिंह, डॉक्टर अमीरुल हसन, डॉ रविकांत, डा प्रांसी असाटी, डॉ सौरभ सक्सेना, डॉ मनीष कुमार , हेल्पडेस्क मैनेजर महेंद्र पटेल, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ इत्यादि अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नंदलाल यादव हॉस्पिटल क्वालिटी मैनेजर द्वारा किया गया।

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