Sunday, October 11, 2026

​नवरात्रि —रविंद्र तंवर "सूर्योदय"

 
नित्य संदेश 

​नवरात्रि

​प्रथम दिन होती घटस्थापना,

स्वागत माँ का करते हैं।


​नौ रूपों में पूजी जातीं,

पंडाल खूब सजते हैं।


​यूँ तो बसी हो कण-कण में माँ,

फिर भी तुम नौ दिन आती हो।


​हर नारी में है छवि तुम्हारी,

जन-जन को ये समझाती हो।


​परस्त्री लगती माता,

हर बच्ची में देवी दिखती है।


​और बीत जाते जब नौ दिन,

तो माँ तेरी छवि क्यों मिटती है‌।


​नौ दिन तो करते खूब भक्ति,

दिन दसवें रावण बन जाते हैं।


​कहीं लुटती लाज किसी की,

कहीं गर्भ में बेटी मरती है।


​हे माँ जगदम्बा जगत-जननी,

"रवि" तेरी महिमा का क्या बखान करे।


​कैसे करे तेरी भक्ति-आराधना,

माँ कैसे तेरा गुणगान करे।


​इस बार माँ न आना तू मात्र नौ दिन,

हर दिन को नवरात्रि बना देना।


​न लूटे किसी नारी की अस्मत,

बस इतनी कृपा बरसा देना।



​— रविंद्र तंवर "सूर्योदय"

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