Friday, October 9, 2026

निदेशक शोध प्रो. बीर पाल सिंह सहित सीसीएसयू के आठ वैज्ञानिक विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल

 


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) ने शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2026 की विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में विश्वविद्यालय के आठ वैज्ञानिकों को स्थान मिला है। वर्ष 2025 में इस सूची में विश्वविद्यालय के तीन वैज्ञानिक शामिल थे। एक साल में संख्या तीन से बढ़कर आठ होना विश्वविद्यालय के शोध कार्यों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।


सूची में प्रो. पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता,  प्रो. सुरेश वीर सिंह राणा, निदेशक शोध प्रो. बीर पाल सिंह, डॉ. सरू कुमारी, डॉ.  विकास कुमार सिंह, डॉ योगेंद्र कुमार गौतम, डॉ वैशाली एम. पाटिल और डॉ ज्योति सी. चौधरी शामिल हैं। इनके शोध कार्य पादप जीव विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान, नेटवर्किंग एवं दूरसंचार, विषविज्ञान, अनुप्रयुक्त भौतिकी, औषधीय एवं जैव-अणुक रसायन तथा रसायन विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं। विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची Scopus के शोध एवं उद्धरण संबंधी आंकड़ों पर आधारित है। इसमें कुल उद्धरण, एच-इंडेक्स, एचएम-इंडेक्स और कंपोजिट इंडिकेटर (सी-स्कोर) जैसे मानकों के आधार पर वैज्ञानिकों के शोध प्रभाव का मूल्यांकन किया जाता है। चयन के लिए वैज्ञानिकों का सी-स्कोर के आधार पर विश्व के शीर्ष एक लाख वैज्ञानिकों में स्थान या अपने संबंधित उपक्षेत्र में शीर्ष दो प्रतिशत में होना आवश्यक है। वर्ष 2026 का यह संस्करण एक अगस्त 2026 के Scopus डेटा स्नैपशॉट पर आधारित है। इसमें करियर-लॉन्ग शोध प्रभाव के आंकड़े वर्ष 2025 के अंत तक और एकल वर्ष के प्रभाव के आंकड़े कैलेंडर वर्ष 2025 में मिले उद्धरणों पर आधारित हैं।


कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी चयनित वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के आठ वैज्ञानिकों का विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होना पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। यह शिक्षकों ,शोधार्थियों की मेहनत, शोध के प्रति समर्पण और अकादमिक उत्कृष्टता का परिणाम है। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से इस उपलब्धि से प्रेरणा लेकर शोध एवं नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।


निदेशक रैंकिंग प्रो. मृदुल कुमार गुप्ता ने चयनित वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि एक वर्ष में संख्या तीन से बढ़कर आठ होना शोध की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव में हो रही प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां विश्वविद्यालय की वैश्विक अकादमिक पहचान को मजबूत करती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण शोध एवं नवाचार के माध्यम से नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।

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