Tuesday, October 13, 2026

मिस्टर छेटेन दोरजी ने सुभारती विश्वविद्यालय में भूटानी विद्यार्थियों से किया संवाद, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने का दिया संदेश



नित्य संदेश ब्यूरो


मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में रॉयल भूटानी दूतावास, नई दिल्ली के शिक्षा अताशे मिस्टर छेटेन दोरजी (Mr. Tsheten Dorji, Education Attaché, Royal Bhutanese Embassy, New Delhi) ने भूटानी विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उनकी शैक्षणिक प्रगति, अनुभवों और समस्याओं की जानकारी ली। कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने के साथ भारत और भूटान के बीच शैक्षणिक सहयोग को और मजबूत बनाना रहा।



विश्वविद्यालय भ्रमण के दौरान मिस्टर छेटेन दोरजी ने कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल, डीन ऑफ फाइन आर्ट्स प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा, सुभारती स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के निदेशक डॉ. हीरो हितो तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी एवं वैश्विक संबंध निदेशक सुश्री हेमलता शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान भूटानी विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, कल्याण, आवश्यकताओं और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के विषय पर चर्चा हुई। साथ ही, दोनों देशों के शैक्षणिक संबंधों को नई दिशा देने तथा विद्यार्थियों के हित में आपसी समन्वय बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।



विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मिस्टर छेटेन दोरजी ने कहा कि भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करना केवल डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, अनुभव और व्यक्तित्व विकास की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और शिक्षा के साथ अनुशासन, ईमानदारी तथा जिम्मेदारी को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।




उन्होंने कहा कि भारत  में अर्जित ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग अपने देश और समाज के विकास में किया जाए। भारत में शिक्षा प्राप्त कर रहे भूटानी विद्यार्थी भविष्य में अपने देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए उन्हें अध्ययन के प्रति गंभीर रहने, नई तकनीकों एवं कौशलों को सीखने और अपने भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।



मिस्टर दोरजी ने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय मूल्यों को बनाए रखने के साथ भारत की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक विविधता का सम्मान करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने व्यवहार, कार्यशैली और उपलब्धियों के माध्यम से अपने देश की छवि प्रस्तुत करते हैं। इसलिए उनका आचरण जिम्मेदार, सकारात्मक और प्रेरणादायी होना चाहिए। शिक्षा के दौरान प्राप्त अनुभवों और दक्षताओं का लाभ भविष्य में भूटान के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए उठाया जाना चाहिए।



उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी संदेश दिया कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और क्षमताओं से समाज के लिए उपयोगी कार्य करना है। निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, कठिन परिश्रम, समय का सदुपयोग और सकारात्मक दृष्टिकोण विद्यार्थियों को अपने लक्ष्यों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के कल्याण, शैक्षणिक प्रगति और आवश्यक मार्गदर्शन के लिए भूटानी दूतावास तथा सुभारती विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी शैक्षणिक या अन्य आवश्यक सहायता के लिए वे विश्वविद्यालय प्रशासन और दूतावास के संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। इससे उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करने और उनकी शैक्षणिक यात्रा को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम का समापन भारत और भूटान के बीच शैक्षणिक सहयोग, सांस्कृतिक समझ और मैत्रीपूर्ण संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के संकल्प के साथ हुआ। इस संवाद ने विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने तथा अर्जित ज्ञान और कौशल के माध्यम से अपने देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया।



स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ, एक बहुविषयक विश्वविद्यालय है, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय अपने विविध शैक्षणिक कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावहारिक ज्ञान और सर्वांगीण विकास के अवसर प्रदान करता है।


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